
मेघालय की चंद्रमोहन झा यूनिवर्सिटी ने देश और दुनियाभर में पीएचडी की चार हजार फर्जी डिग्रियां आवंटित की हैं। दो से लेकर पांच लाख रुपये में ये डिग्रियां बेची गईं। सूत्रों की मानें तो महाराष्ट्र के साथ ही उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में इस यूनिवर्सिटी से डिग्री खरीदने के बाद कई लोग अहम पदों पर बैठे हैं। उत्तराखंड में तो कुछ कालेजों ने इसी फर्जी डिग्री के सहारे सरकार से मान्यता ली हुई है। उच्चस्तरीय जांच हुई तो इन कालेजों की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
सीएमजे यूनिवर्सिटी ने पिछले कुछ वर्षों में जमकर डिग्रियां बेची हैं, जिसका खुलासा होने पर मेघालय के राज्यपाल आरएस पुसाहारी ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने यूनिवर्सिटी का कार्यालय, कैंपस सील कर दिया है। जबकि खुद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री पल्लम राजू ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को सीएमजे यूनिवर्सिटी से संबंधित फर्जी डिग्रियों की सूची नेट पर जारी करने को कहा है ताकि यह पता लगाया जा सके देश और दुनियाभर में किन-किन लोगों ने यहां से पीएचडी की डिग्री हासिल की है।
इस फर्जीवाड़े के बाद यूनिवर्सिटी के संचालक कुलपति चंद्रमोहन झा गायब हैं। यूनिवर्सिटी के एचआर मैनेजर सहित तीन लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है। सूत्रों की मानें तो इस यूनिवर्सिटी से अधिकतर डिग्रियां महाराष्ट्र में बेची गई हैं। उत्तराखंड में कुछ प्राईवेट कालेजों के डायरेक्टर इसी यूनिवर्सिटी से डिग्री हासिल किए हैं। शासन ने उच्चस्तरीय जांच बैठाई तो इन कालेजों की मान्यता समाप्त हो सकती है।
महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई शुरू की
महाराष्ट्र सरकार ने डिग्री बेचे जाने के मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई शुरू कर दी है। महाराष्ट्र में यह पता किया जा रहा है कि किन-किन लोगों ने फर्जी डिग्रियां ली हैं। कालेज के डायरेक्टर पद के लिए पीएचडी होना अनिवार्य है। सूत्रों की मानें तो उत्तराखंड में कुछ कालेजों, विश्वविद्यालयों में अहमद पदों पर बैठे लोग इस यूनिवर्सिटी से डिग्री खरीदकर बैठे हैं।
प्राईवेट यूनिवर्सिटी के डायरेक्टरों की रिपोर्ट हमारे पास नहीं है। सरकारी कालेजों के डायरेक्टरों के इस यूनिवर्सिटी से डिग्री लाने की जानकारी नहीं है। कोई ऐसा मामला सामने आया तो कार्रवाई की जाएगी।
