यात्रा मार्ग के होटल ढाबों पर पसरा सन्नाटा

नई टिहरी। चारधाम यात्रा के समय गुलजार रहने वाले चंबा-धरासू मोटर मार्ग पर इन दिनों सन्नाटा पसरा हुआ है। अब न तो सड़क पर गाड़ियों की कतारें है और न होटल-ढाबों में भोजन, चाय, नाश्ते के लिए यात्रियों की भीड़। कारोबारी खाली बैठे नजर आ रहे हैं। व्यवसाय न चलने से कई लोगों ने अपने यहां काम करने वाले कर्मचारियों को घर भेज दिया है।
16 जून को आई प्रलय से केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा बंद होने से चंबा-धरासू मार्ग पर व्यवसाय करने वाले करीब 300 सौ छोटे-बड़े कारोबारियों की कमर टूट गई है। इस संवाददाता ने मोटर साइकिल से यात्रा मार्ग का भ्रमण कर कई काराबारियों का हाल जाना तो उनका दर्द यूं सामने आया। बुधवार की दोपहर करीब 11.30 बजे कोट गांव पहुंचने पर चाय विक्रेता वाला मोर सिंह बेहद परेशान दिखा। क उसका कहना था कि अब क्या करें यात्रा बंद हो गई। काम नहीं चल रहा खेत भी बाढ़ में बह गए। 12.30 बजे रत्नोगाड़ (शंकरबैंड) पहुंचने पर अनार सिंह पंवार अपना भोजनालय बंद कर सड़क किनारे बैठे मिले। कहने लगे बामुश्किल पैसा खर्च कर होटल बनाया था। लेकिन यात्रा नहीं चलने से अपने भी खाने के लाले पड़ गए हैं। 1.45 बजे कोटीगाड़ मे रेस्टोरेंट संचालक लोकेंद्र डोभाल से मुलाकात हुई। डोभाल का कहना था कि वर्ष 2010 की आपदा यहां करीब 20 दुकानें बहाकर ले गई थी। तब आपदा मंत्री ने दौरा कर एक-एक लाख रुपये मुआवजे का ऐलान किया था जो आज तक नहीं मिला। कठिन परिस्थितियों में दुकान बनाकर फिर से जिंदगी संवरने लगी थी। अब यात्रा बंद होने पर खाली बैठे हैं। कंडीसौड़ में होटल व्यवसायी ध्यान बिष्ट लड़खडाती आवाज में बोले, यात्रा देर से शुरू हुई। फिर भी सबकुछ ठीकचल रहा था। लेकिन 16 जून से सन्नाटा पसरा हुआ है। दुकान का किराया देना भी मुश्किल हो गया है। मिठाई विक्रेता राकेश लसियाल के अनुसार धंधा चौपट हो गया है। टैक्सी चालक कर्ण सिंह भंडारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि आपदा ने छोटे लोगों का निवाला छीन लिया है।

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