मौसम के मिजाज पर टिका मंड का भविष्य

नूरपुर (कांगड़ा)। लगातार सात दिन तक मंड क्षेत्र में तबाही मचाने वाले पौंग बांध के फ्लड गेट आखिरकार मंगलवार सुबह 11 बजे बंद कर दिए गए। इससे अब तक बाढ़ से खौफ में पल-पल गुजार रहे मंड क्षेत्र के लोगों ने पानी कम होने से कुछ राहत की सांस ली, लेकिन प्रशासन की तरफ से चलने वाले राहत एवं बचाव कार्य की गति आने वाले दिनों में काफी हद तक मौसम के मिजाज पर निर्भर करेगी।
मंगलवार को एसडीएम जवाली एमएल शर्मा समेत बीडीओ फतेहपुर जगन ठाकुर, नायब तहसीलदार पूर्ण चंद, जिप उपाध्यक्ष जगदेव सिंह समेत अन्य विभागीय अधिकारियों ने मंड क्षेत्र की बाढ़ प्रभावित पंचायतों का दौरा किया। रियाली व बहादपुर पंचायतों में ग्रामीणों को 4 टैंट व 2 किश्तियां मुहैया करवाई गईं। इंदौरा तहसील के तहत पड़ने वाली बाढ़ प्रभावित पंचायतों में 30 तिरपालें वितरित की गई। इससे पहले एसडीएम नूरपुर ने इंदौरा में विभागीय अधिकारियों की बैठक लेकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जल्द राहत पहुंचाने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए। लेकिन मंगलवार शाम को अचानक फिर से मौसम के बिगड़े मिजाज से मंड क्षेत्र पर बाढ़ का खतरा भी गहराने लग पड़ा है। अब तक पराल, मंड भोग्रवां, मंड मियानी, मंड सनौर व बसंतपुर इत्यादि पंचायतों में करीब 200 रिहायशी मकान बाढ़ की चपेट में हैं। इनमेें खासकर मंड भोग्रवां में फंसे 200 ग्रामीणों को निकाल कर सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। जबकि बाढ़ से कई गांवों में बिजली के खंभे बह जाने से लोग अंधेरे में रातें काटने को मजबूर हैं। कई सड़कों के बहने से लोगों को मीलों लंबा सफर तय करना पड़ रहा है।

नुकसान की पहली रिपोर्ट
मंड क्षेत्र में पौंग के पानी से हुए नुकसान की पहली अधिकारिक रिपोर्ट मंगलवार जिला प्रशासन को प्रेषित कर दी गई। इसमें इंदौरा तहसील के तहत पड़ने वाली घंडरा, भोग्रवां, पराल, मीलवां, उलैहड़िया, सुरड़वा, सनौर इत्यादि पंचायतों के करीब 17 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। इनमें 3 मकान पूर्ण व 160 आंशिक रूप से बाढ़ के पानी से क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि, बाढ़ से नुकसान की यह प्रारंभिक रिपोर्ट है, लेकिन मंगलवार को पानी का स्तर कम होने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को नुकसान की विस्तृत रिपोर्ट बनाने के निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।

बीमारियां फैलने का खतरा
पौंग बांध के पानी से लबालब सीमावर्ती मंड क्षेत्र में अब मलेरिया, डेंगू, डायरिया आदि बीमारियों के फैलने का भी अंदेशा हो गया है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के निर्देश जारी किए हैं। लोगों को भी सतर्क रहने को कहा गया है।

क्या कहते हैं एसडीएम
नूरपुर के एसडीएम अश्वनी सूद ने बताया कि पौंग बांध के फ्लड गेट बंद होने से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पानी का स्तर पहले के मुकाबले काफी कम हुआ है और प्रशासन ने भी राहत कार्य तेज कर दिया है। जो आने वाले दिनों में काफी कुछ मौसम के मिजाज पर निर्भर करेगा।

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