मौसम का कहर, रुद्रप्रयाग में पांच लोगों की जान ली, नदी नाले उफान पर,

मानसून की शुरुआती बारिश कहर बनकर टूटी है। दो दिनों से लगातार हो रही बारिश से रविवार को उत्तरकाशी और रुद्रप्रयाग जिलों में हालात बेकाबू हो गए। रुद्रप्रयाग में बारिश के कहर से चार लोगों की मौत हो गई, एक व्यक्ति लापता हो गया। अलकनंदा और मंदाकिनी नदी खतरे के निशान को पार कर गई। जवाड़ी झूला पुल पानी में डूब गया। गौरीकुंड बस पार्किंग में खड़ी एक बस और पांच छोटे वाहन मंदाकिनी की बाढ़ में बह गए। उत्तरकाशी जिले में भी नदी नाले उफान पर होने से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। तमाम भवन और खेत नदी नालों की भेंट चढ़ गए, कई घर ढहने की कगार पर हैं। खरादी में पटवारी चौकी बह गई। गंगोत्री मार्ग में बाढ़ सुरक्षा कार्यों में लगी मशीनें बाढ़ में समा गई। असी गंगा घाटी में सात गांवों की करीब तीन हजार आबादी जिला मुख्यालय से अलग-थलग पड़ गई। मनेरी भाली प्रथम व द्वितीय चरण परियोजना में विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। उत्तरकाशी जिला प्रशासन ने आपदा के हालात देखते हुए हाई अलर्ट घोषित कर आईटीबीपी और सेना की मदद मांगी है। जिले में प्रभावितों के लिए 15 राहत शिविर बनाए गए हैं।

संस्कृत महाविद्यालय छात्रावास के दो भवन ढहे
बाढ़ सुरक्षा कार्य में लगी भारी मशीनें भी चपेट में
खतरे के निशान से ऊपर बह रही गंगा-भागीरथी
उत्तरकाशी। लगातार बारिश से गंगा भागीरथी, असी गंगा समेत जिले के तमाम गाड गदेरों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। जिला मुख्यालय क्षेत्र के तटवर्ती हिस्सों में कटाव एवं मकानों के ढहने का सिलसिला जारी है। बाढ़ सुरक्षा कार्य में लगी भारी मशीनें बाढ़ में समा गई हैं। उजेली में कैलाश आश्रम के सामने संस्कृत महाविद्यालय छात्रावास के दो भवन तथा स्नान घाट समेत यहां बने दो मंदिर भागीरथी में बह गए। तिलोथ पुल की बाजार छोर वाली एप्रोच फिर ढहने से इस पुल से पैदल आवाजाही भी बंद हो गई है। तिलोथ मांडो क्षेत्र में कटाव बढ़ने से दो बहुमंजिले भवन ढह चुके हैं। एक दर्जन से अधिक मकानों के नीचे कटाव से इनका ज्यादा समय तक खड़े रह पाना मुश्किल लग रहा है।
गंगोत्री से लेकर जोशियाड़ा तक चल रहे बाढ़ सुरक्षा कार्यों में लगी मशीनें बाढ़ की चपेट में आ गई हैं। करीब आधा दर्जन पोकलैंड व जेसीबी, एक डंपर तथा एक दर्जन से अधिक मिक्सर व डिवाटरिंग पंप असी गंगा व भागीरथी के उफान में बह गए। यमुना नदी में आए उफान से खरादी में पटवारी चौकी बह गई तथा दो होटल अधर में हैं।

फिर अलग-थलग पड़े असी गंगा घाटी के सात गांव
कई पुलिया और सड़क का बड़ा हिस्सा नदी में समाया
उत्तरकाशी। असी गंगा घाटी में 24 घंटे की मूसलाधार बारिश से जलप्रलय की स्थिति पैदा हो गई है जिससे सात गांवों की करीब तीन हजार आबादी फिर जिला मुख्यालय से अलग-थलग पड़ गई है। पिछले वर्ष अगस्त की बाढ़ में क्षेत्र में 16 पुल-पुलिया बहने के बाद आवागमन के लिए बने डिगिला, उत्तरों, सेकू, संगमचट्टी व अगोड़ा की अस्थायी पुलिया समेत घाटी को जोड़ने वाले इकलौते मोटर मार्ग का बड़ा हिस्सा असी गंगा में समा गया।
पिछले वर्ष बीते साल सी गंगा के जलागम क्षेत्र डोडीताल के दरबा टॉप क्षेत्र में बादल फटने से उत्तरकाशी में जलप्रलय मची थी। कई जानें गई और सरकारी व गैर सरकारी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था। 4.5 मेगावाट की असी गंगा प्रथम चरण परियोजना के विद्युत गृह में फिर पानी घुस गया। आषाढ़ी आलू को मंडियों तक पहुंचाने का मार्ग न मिलने से उनके खेतों में ही सड़ने की स्थिति पैदा हो गई है। भंकोली इंटर कालेज व कल्डियाणी जूनियर हाईस्कूल पहुंचने के लिए रास्ते ही नहीं बचे है।

कोट……….
अगस्त की बाढ़ गुजरे दस माह बीत गए। सामान्य हालात वाले दिनों में जब हमने रास्ते, पुल आदि निर्माण की मांग की तो अधिकारियों ने हमें यह कहते हुए घुड़क दिया कि ‘हमें पता है क्या करना है।’ अब आपदा आने पर अधिकारियों से पूछो तो कहते हैं कि ‘अब इसमें हम भी क्या कर सकते हैं?’ – कमल सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य बाड़ाहाट।

नदी तल ऊंचे होने से हालात हुए ज्यादा खराब
उत्तरकाशी। नदी तल ऊंचे होने से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। पिछले वर्ष अगस्त में असी गंगा और भागीरथी में आई बाढ़ में संगमचट्टी से लेकर गंगोरी संगम तथा भटवाड़ी से लेकर मनेरा तक नदी के प्रवाह पथ पर भारी मलबा जमा हो गया था। अधिकांश जगह नदी तल पांच से सात मीटर तक ऊंचा उठ गया था। प्रशासन ने आबादी के लिए खतरे वाले सात स्थान चिह्नित कर यहां से मलबा हटाने के लिए निविदाएं तो आमंत्रित की, लेकिन अब तक नदी तल को सामान्य नहीं किया जा सका। मई में पारा चढ़ने पर ग्लेशियरों के पिघलने में आई तेजी से ही उफान मारती नदी ने भविष्य के खतरे को लेकर आगाह किया और अब जून में बारिश ने आशंकाओं को सच साबित करना शुरू कर दिया है।

भागीरथी के उफान ने थामी परियोजना की टरबाइनें
उत्तरकाशी। भागीरथी में जलप्रलय की स्थिति पैदा होने पर मनेरी भाली प्रथम व द्वितीय चरण परियोजना में विद्युत उत्पादन बंद करना पड़ा। रविवार को भागीरथी में वाटर डिस्चार्ज 1200 क्यूमेक्स से अधिक दर्ज किया गया।
तिलोथ विद्युतगृह के ईई केके जायसवाल ने बताया कि रविवार सुबह चार बजे भागीरथी में पानी बढ़ने पर विद्युत उत्पादन बंद कर दिया गया था। भागीरथी में बढ़ा पानी पावर हाउस की टेल रेस चैनल में जोर मारने लगा है। उन्होंने बताया कि शनिवार रात तक परियोजना की 90-90 मेगावाट की तीनों टरबाइनें फुल लोड पर चल रही थीं। रविवार दोपहर को अधिकतम वाटर डिस्चार्ज 1161 क्यूमेक्स मापा गया। उधर, धरासू विद्युत गृह के डीजीएम विपिन बिहारी सिंघल ने बताया कि यहां रविवार सुबह 4.20 बजे उत्पादन बंद करना पड़ा। इससे पहले चारों टरबाइनों से 246 मेगावाट उत्पादन हो रहा था। जोशियाड़ा बैराज पर अधिकतम वाटर डिस्चार्ज 1190 क्यूमेक्स मापा गया।

उत्तरकाशी में हाई अलर्ट, बनाए राहत कैंप
उत्तरकाशी। जिलाधिकारी डा आर राजेश कुमार ने बताया कि आपदा के हालात देखते हुए जिले में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है। प्रभावितों के लिए 15 राहत शिविर बनाए गए हैं। उत्तरकाशी नगर में खतरे की जद में आए भवनों से रह रहे चार सौ लोगों को इन शिविरों में विस्थापित किया गया है। आईटीबीपी व आर्मी से भी सहयोग मांगा जा रहा है। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह फंसे यात्रियों को निकटवर्ती स्कूल, होटल, आश्रमों में ठहराया जा रहा है। सभी सरकारी एवं गैर सरकारी विद्यालयों में हालात सामान्य होने तक के लिए अवकाश घोषित कर दिया गया है।

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