
लोहाघाट। नेपाल के बजांग जिले के भीम बस्ती गांव का 28 वर्षीय युवक जनकसिंह गौरीकुंड में मौत से साक्षात्कार कर सकुशल खेतीखान के पारगोशनी गांव पहुंच गया है, जहां वह परिवार के साथ पिछले 10 वर्षों से रह रहा है। जनक प्रतिवर्ष रोजगार के लिए चार धाम यात्रा में जाया करता था। इस बार वह 10 मई को गौरीकुंड के लिए रवाना हो गया था। गौरीकुंड के एक होटल में एक माह तक काम करने के बाद वह केदारनाथ गया, जहां 15 जून को उसने प्रकृति का महाविनाश अपने आंखों के सामने देखा। 16, 17, 18 जून को अन्य लोगों के साथ वह भी गौरी गांव तक भागते हुए पहुंचे। यहां से सोनप्रयाग में नदी को पार करना बड़ा कठिन था। एक पूर्व फौजी के कहने पर तीन चार सौ लोगों ने चीड़ के सूखे पेड़ को नदी में डाला और पार होकर फाटा पहुंचे, जहां 150 रुपये थाली भोजन मिल रहा था। जनक ने तीन हजार रुपये कमाए थे। उन्हीं रुपयों के सहारे वह जैसे-तैसे घर पहुंचा है।
