मौत को सामने गुजरते देखा

लोहाघाट। नंदादेवी राजजात यात्रा के लिए विशेष प्रशिक्षण लेने गए पिंडर ग्लेशियर गए चंपावत जिले के 30 युवक सकुशल लौट आए हैं। यह दल पिंडर घाटी के द्वाली में लगातार पांच दिनो तक फंसा रहा। इनमें प्रशिक्षित युवकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर जहां स्वयं को सुरक्षित रखा वहीं इन्होंने अन्य पर्यटकों को भी नया जीवन दिया। इस दल का नेतृत्व कर रहे विनोद भट्ट, बीबी जोशी, मनीष जोशी, विनय अरोड़ा ने वहां के हालातों को बयां किया। उनका कहना था कि प्रकृति का वीभत्स रूप तथा मौत को अपनी आंखों के सामने से गुजरते हुए देखा। यह दल गोर्खा रेजीमेंट के जवानो की मदद से सुरक्षित नदी पार लाया गया।
रियल एडवेंचर के बैनर तले गए संस्था के निदेशक आशीष जोशी ने वहां के हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि मनुष्य तथा प्रकृति के बीच टूटते रिश्तों के कारण पैदा हुई परिस्थितियों के दल के लोग साक्षी बने तथा इस विनाश लीला ने हम सब को भविष्य के प्रति सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। उनका कहना था कि रेस्क्यू प्रशिक्षण के लिए उनके पास सभी उपकरण मौजूद थे। इस कारण वह विषम परिस्थितियों का मुकाबला करने का साहस करने में सफल रहे। श्री जोशी के अनुसार दल में शामिल आधा दर्जन एनसीसी कैडेटों को सेना द्वारा सम्मानित किया जाएगा। यहां पहुंचने पर क्षेत्रीय विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, जिलाधिकारी दीपेंद्र चौधरी, पर्यटन अधिकारी एसएस यादव, सुभाष बगौली ने दल के सभी लोगों का भावपूर्ण स्वागत करते हुए उनके स्मरण सुने तथा दल के सुरक्षित लौटने पर सभी को बधाई भी दी।

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