मौत के मुहाने में जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं 50 परिवार

नैनीताल। सरोवर नगरी का जिक्र आते ही यूं तो खूबसूरत नैनीझील, पर्यटक स्थल, होटल, रिसार्ट्स की तस्वीर उभर जाती है। लेकिन शहर की एक भयावह तस्वीर भी है, जिससे देखकर रोंगटे खड़े हो जाएं। नगर के अस्तित्व के लिए अहम् बलियानाला क्षेत्र में लगातार भू स्खलन हो रहा है। यहां रह रहे लगभग 50 परिवार झुके हुए मकान, दरकी हुई दीवार के बीच मौत के मुहाने में जिंदगी बसर करने को मजबूर हैं।
अमर उजाला की टीम ने शुक्रवार को बलियानाला क्षेत्र से लगे रईस होटल परिसर का भ्रमण किया। यहां स्थित जीआईसी मैदान का बड़ा हिस्सा भू-स्खलन के चलते धंसकर बलियानाला में समा चुका है, एक हिस्सा दरककर उसमें जाने को तैयार है। बलियानाला के धंसाव के कारण यहां स्थित सभी भवन झुक गए हैं। जिनकी दीवारों में लगभग फुट भर तक की दरारें हैं। फटे फर्स को पत्थर, प्लास्टिक अथवा बोरे से भरा गया है। छत तथा दीवारों से पानी कमरों में आना आम बात है। गरीबी से लाचार लोग मौत के मुहाने में बैठकर ईश्वर से जान की सलामती की प्रार्थना कर रहे हैं।
भगवती का कहना है कि उनके पिता रघुनाथ नाव चलाकर पांच सदस्यों की नौका खींच रहे हैं। बड़ा भाई मोहन विकलांग है। 30 वर्षों से वह यहां रह रहे हैं। ऐसे में वह जाएं भी तो कहां। रेखा देवी का कहना है कि उसके पति बलबीर फेरी लगाकर दो बच्चों के परिवार पाल रहे हैं। बरसात में सारी रात वह जागकर गुजारते हैं। 50 वर्षों से यहां रह रही मधु बिष्ट अपने पुत्र इंदर, बहू विमला, पुत्री निर्मला दामाद बबलू तथा नाती पोतों समेत यहां रहती हैं। उनका कहना है कि बीते वर्षों की बरसात तो कट गई लेकिन इस वर्ष सूबें में आई आपदा के बाद वह डरे हुए हैं। जानकी देवी, भगवती देवी, बसंती देवी के मकानों में भी दरारे हैं। घर की स्थिति देखकर यहां पल भर खड़े रहने में भी डर सा रहता है। लेकिन पूछताछ में उन्होंने कहा कि वह ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि उनके साथ कोई अनहोनी न हो अगर हो तो रोने के लिए कोई न बचे। लगभग पांच दशकों से यहां रह रहे विमल जोशी के परिवार की भी यही व्यथा है। उनका कहना है कि अब तो वह दुर्गापुर में मिलने वाले आवासों का इंतजार कर रहे हैं।

22.75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव विचाराधीन
नैनीताल। बलियानाला क्षेत्र के संरक्षण की कार्यदायी संस्था सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता हेम जोशी तथा अवर अभियंता पंकज ढौंढियाल ने बताया कि 2002 में क्षेत्र में 15.52 करोड़ रुपये के कार्य किए गए थे। जिससे कई वर्षों तक भू-स्खलन रुका था। विभाग की ओर से 22.75 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।

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