मोदी को ‘न’ और राहुल को ‘हां’, यह कैसी सियासत?

मोदी को ‘न’ और राहुल को ‘हां’, यह कैसी सियासत?

देहरादून: उत्तराखंड में तबाही के एक सप्ताह बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के उत्तराखंड के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के दौरे पर जाने के बाद काफी हंगामा मचा हुआ है। दरअसल, उत्तराखंड की सरकार और केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने गत दिनों गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को हवाई सर्वे तक सीमित रखा था, लेकिन सोमवार को राहुल गांधी को न सिर्फ उत्तराखंड में लैंडिंग की इजाजत दी गई बल्कि उन्हें गोचर में आईटीबीपी के कैंप में रात भी गुजारने दी गई।

शिंदे ने मोदी को उत्तराखंड जाने से रोकने के लिए कहा था कि सभी एजेंसियां राहत और बचाव के प्रयासों में लगी हैं। ऐसे दौरों से उनके काम में रुकावट आती है। अगर कोई फिर भी वहां जाता है या हवाई दौरा करता है तो उसे लैंडिंग की इजाजत नहीं दी जाएगी। उनका कहना था कि वीआईपी दौरे से पुलिस उनकी सुरक्षा के तामझाम में लग जाएगी जिससे राहत व बचाव कार्य प्रभावित होगा। सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने भी मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि कुछ लोग ‘आपदा पर्यटन’ पर निकले हैं।

लेकिन यही कांग्रेस के लोग अब अपने युवराज का बचाव करते हुए दिख रहे हैं। इस बाबत जब न्यूज चैनलों ने सुशील कुमार शिंदे से पूछा तो उन्होंने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि दौरे न करने की सलाह शुरुआती तीन-चार दिनों के लिए थी, अब स्थिति नियंत्रण में है। राहुल के दौरे से राहत और बचाव कार्य में कोई बाधा नहीं आएगी। वहीं कांग्रेस नेता रेणुका चौधरी ने कहा कि वह उत्तराखंड बतौर कांग्रेस उपाध्यक्ष गए हैं न कि वीआईपी की हैसियत से। रेणुका के इस बयान पर भाजपा वाले सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि रेणुका चौधरी का यह तर्क किसी के गले नहीं उतरता कि एसपीजी सुरक्षा प्राप्त राहुल गांधी के आपदा प्रभावित क्षेत्रों के दौरे से राहत और बचाव कार्य प्रभावित नहीं हुआ होगा।

राहुल की यात्रा का बचाव करते हुए दिग्विजय सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि राहत और बचाव के मुख्य काम पूरे हो चुके हैं। अगर कुछ काम बाकी भी है तो राहुल गांधी ने हेलिकॉप्टर का सहारा नहीं लिया है। वह सड़क मार्ग से गए हैं। लेकिन दिगि राजा की यह बात भी गले से नीचे उतरती प्रतीत नहीं होती। देहरादून तक विमान से पहुंचे राहुल गांधी अगर सड़क मार्ग से गुप्तकाशी जाते तो इसमें कई घंटों का समय लग जाता। देहरादून से गुप्तकाशी की दूरी 224 किलोमीटर है। वहीं, रूद्रप्रयाग से गुप्तकाशी की दूरी 39 किलोमीटर है और यह रास्ता बेहद दुर्गम है। हाल की बारिश और बाढ़ की चपेट में आने से रूद्रप्रयाग और गुप्तकाशी के बीच सड़क भी कई जगहों पर टूट गई है।

गौरतलब है कि राहुल सबसे ज्यादा प्रभावित रुद्रप्रयाग गए। रात को वह गोचर में आईटीबीपी के गेस्ट हाउस में रुके। इसके बाद सुबह हेलिकॉप्टर से गुप्तकाशी पहुंचे और वहां अस्पताल में भर्ती लोगों के अलावा स्थानीय लोगों से से भी मिले। उनका पूरी तरह से तबाह हो चुके केदारनाथ और बद्रीनाथ जाने का भी कार्यक्रम है।

काबिले जिक्र है कि इस आपदा की घड़ी में राहुल के देश से बाहर होने को बीजेपी ने मुद्दा बना दिया था। जबकि नरेंद्र मोदी उत्तराखंड पहुंच गए थे और दावा किया गया था कि उनके दो दिन के दौरे के दौरान उन्होंने वहां फंसे करीब 15000 गुजरातियों के घर लौटने की व्यवस्था करवा दी थी। आपदा प्रभावितों से ‘हमदर्दी’ की इस रेस में राहुल पीछे छूटते दिख रहे थे। इसके चलते राहुल गांधी रविवार की शाम भारत लौटे और अगले ही दिन उन्होंने उत्तराखंड के प्रभावित क्षेत्रों का रुख किया।

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