
पांवटा साहिब (सिरमौर)। प्रदेश में मनरेगा योजना पंचायत में विकास को गति प्रदान कर रही है। इससे हर वर्ष हजारों लोगों को घर द्वार पर रोजगार मिल रहा है। पांवटा विकास खंड की कई पिछड़ी एवं दुर्गम पंचायतों में योजना कार्य जोर पकड़ रहा है। जबकि मैदानी पंचायतें में मनरेगा का कार्य मंदा है।
पांवटा विकास खंड में कुल 64 पंचायतों में 1 अप्रैल से 24 दिसंबर तक मनरेगा की कुल 4.92 करोड़ में से 3.67 करोड़ राशि ग्राम पंचायतों में खर्च हो चुकी है। जबकि 916 विकास कार्यों में से 103 पूरे हो चुके हैं। 113 परिवारों को 100 दिनों का रोजगार मिला है। जहां योजना में दूर दराज की पिछड़ी पंचायतों में विकास को गति प्रदान की है। वहीं मैदानी क्षेत्र की पंचायतों को विकास कार्य की मांग तक भेजना कठिन हो रहा है।
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इस वर्ष मनरेगा में टॉप-10 पंचायतें
पंचायत का नाम विकास पर खर्च बजट
डांडा 36.68 लाख
कांडो कांसर 14.48 लाख
हरिपुरखोल 13.81 लाख
टिटियाना 13.63 लाख
कठवार 12.74 लाख
अंबोया 12.70 लाख
डोबरी सालवाला 12.45 लाख
भरोग बनेड़ी 12.26 लाख
छछेती 12.01 लाख
खोदरी पंचायत 10.25 लाख
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पिछड़ी टाप-10 पंचायतें
पुरुवाला, कुंजा मतरालियों, पातलियों, पिपलीवाला, फूलपुर, बद्रीपुर, ब्यास, बहराल, भांटावाली एवं रामपुर बंजारन शामिल हैं।
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मनरेगा में कम दिहाड़ी : जनप्रतिनिधि
ग्राम पंचायत प्रधान अजमेर सिंह, बलजीत सिंह, प्रीतपाल सिंह एवं जसबीर सिंह का कहना है कि मनरेगा योजना में मजदूर को 138 रुपये एवं मिस्त्री को 271 रुपये दिहाड़ी मिल रही है। जबकि औद्योगिक इकाइयों में मिस्त्री को 350 से 450 तक दिहाड़ी मिल रही है। लोग क्यों मनरेगा में काम करेंगे।
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मनरेगा लाभ सभी पंचायतों तक पहुंचाएंगे : ललित दुल्टा
पांवटा साहिब (सिरमौर)। पांवटा के बीडीओ ललित दुल्टा ने कहा कि मनरेगा के तहत हर पंचायत में विकास होगा। कुछ समय पहले ही पदभार ग्रहण किया है। क्षेत्र की 64 में से मैदानी क्षेत्र की 18 पंचायतों में योजना कार्य धीमा है। मनरेगा विकास कार्य में पिछड़ी मैदानी क्षेत्र की 10 पंचायतों पर भी पूरा ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। इनमें जनवरी तक विकास कार्य शुरू करवा दिए जाएंगे।
