
धर्मशाला। …मैडम मुझे अब पति के साथ नहीं रहना। जिसे शादी के छह साल बाद अपनी फूल जैसी बेटी की भी याद नहीं आई। वह अब मेरी क्या सुध लेगा और लता महिला आयोग की अदालत में फफक-फफक कर रोने लगी। महिला आयोग की अध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर ने महिला को ढांढस बंधाया और तुरंत पति को फोन लगाकर सबसे पहले पत्नी के खाते में निर्धारित खर्च की राशि जमा कराने के आदेश दिए।
हालांकि महिला आयोग अध्यक्ष ने दोनों को राजीनामे और समझौते की सलाह दी, लेकिन पति के व्यवहार से लता अंदर तक टूट चुकी है। वह अब पति के साथ नहीं रहना चाहती। पालमुपर के पंचरुखी से आई लता की बेटी जन्म से अक्षम है। उसके इलाज का खर्च वह जैसे-तैसे वहन कर रही है। जबकि घर से दूर सोलन में रह रहे पति ने पिछले दो साल से उसे खर्च के नाम पर पाई तक नहीं दी। वीरवार को मंडलायुक्त कार्यालय में महिला आयोग की विशेष अदालत में अध्यक्ष धनेश्वरी ठाकुर ने कुल 29 मामलों की सुनवाई की। इनमें से पांच जोड़ों का समझौता कराया गया।
बड़ाग्रां निवासी जनक राज और बबली के बीच पिछले कुछ सालों से अनबन थी। केस महिला आयोग तक आया और दोनों के बीच सुलह हो गई। वीरवार को अपने पति के साथ सुनवाई को अदालत पहुंची बबली हालांकि भावुक हो गई और रोने लगी। धनेश्वरी ठाकुर ने बबली से अकेले में बात की तो स्पष्ट हुआ कि पुरानी बातों को याद कर बबली का गुबार निकल आया। पति जनकराज ने भी अदालत के सामने पत्नी का ध्यान रखने का वचन दिया। महिला आयोग अध्यक्ष ने बताया कि 29 में से अधिकतर मामले निपटा लिए गए हैं। कुछ मामलों से संबंधित प्रशासन और पुलिस को सूचना दी गई है। आयोग की यह अदालत शुक्रवार को भी चलेगी। इस दौरान सदस्य सचिव आरएस वर्मा और सदस्य शीला देवी भी मौजूद रहीं।
