
नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। पौंग झील में सर्दियों का आनंद उठाने के बाद मेहमान परिंदों ने वतन वापसी के लिए उड़ान भरनी शुरू कर दी है। आधे से ज्यादा विदेशी मेहमान परिंदे वतन वापसी कर चुके हैं।
वन्य प्राणी संरक्षण विभाग ने विभिन्न प्रजातियों के 11 परिंदों जिनमें एक यूरेशियन विजन, तीन नार्दन पिंटेल और तीन कामन टिल, दो ग्रे लेग गूज, दो नार्दन शावलर की सेटेलाइट टैगिंग की और 57 परिंदों को कालर व छल्ले पहनाए। बांबे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के पक्षी विशेषज्ञ एस बालाचंद्रन ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में बताया कि पक्षियों को रिंग व छल्ले तथा सेटेलाइट टैगिंग से भविष्य में इनको ट्रैक किया जा सकता है। 24 हजार वर्ग हेक्टेयर क्षेत्र में फैली पौंग झील में इस बार मंगोलिया, दक्षिण अफ्रीका, मध्य एशिया व चीन की 113 प्रजातियों के प्रवासी पक्षियों ने डेरा जमाया। इस बार फिनलैंड के राष्ट्रीय राज हंस के जोड़े (हूपर स्वान) ने पौंग झील की सुंदरता को पूरी तरह निखार दिया। दूसरी बार मेहमान बने इस प्रवासी पक्षी के जोड़े के पूर्वजों को 113 साल पहले व्यास नदी के अंतिम छोर पर देखा गया था। विभाग के अनुसार इस जोड़े के पूर्वजों को 6 जून 1900 में एक अंग्रेजी अफसर ओएस वार्न ने पौंग बांध निर्माण स्थल से आठ किमी दूर तलवाड़ा में अपने कैमरे में कैद किया था। बहरहाल अब पक्षी प्रेमियों को अगली सर्दियों तक इनकी कलोलों का लुत्फ उठाने के लिए इंतजार करना होगा।
