
पांवटा साहिब (सिरमौर)। साहित्यक एवं सांस्कृतिक संस्था विधा ने हिमाचल निर्माता की 107वीं जयंती धूमधाम से मनाई। इस मौके पर एक कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता एसडीएम पांवटा श्रवण मांटा ने की।
प्रथम सत्र में प्रीति, आस्था, अपूर्वा, शैली, लतिका, हर्षिता, अलौकित, हिमांक, अलंकृत, जयवर्धन, यशवर्धन, भूमि वर्मा और कुणाल सजवान ने सरस्वती वंदना, लोकगीत, गजल गाकर रंग जमाया। इसके बाद कवि गोष्ठी में बाल कवि छवि सैनी ने युवा पीढ़ी पर जम कर तंज कसे। उनकी कविता ‘मेरी आंखों का तारा ही मुझे आंख दिखाता है’ ने दर्शकों के दिल को छू लिया। कुणाल सजवान ने ‘आजादी की गाथा’, ईवा शर्मा ने ‘कुर्सी की पूजा का बोलबाला’ कविता सुनाई। अदिति गोस्वामी ने ‘भ्रूण हत्या’ पर रचना सुनाई। श्वेता ने ‘मां-बाप की सेवा को सर्वोच्च पूजा’ कविता के माध्यम से कहा। भावना चौहान ने ‘मंजिल पाने के लिए इच्छा शक्ति’ कविता, अमृत कौर ने ‘गुरू व शिष्य के गौरवमयी संबंध’ तथा आरुषि ने ‘मातृ भाषा हिन्दी’ की दुर्दशा पर कविता से चिंतन और मनन करने को मजबूर किया।
वरिष्ठ कवि रंजना शर्मा ने राजनीति पर तीखे व्यंग्य बाण छोडे़। सवित्री तिवारी आजमी ने अपनी रचना में हिमाचल के प्रथम मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार के पहाड़ी व्यंजनों के प्रति प्रेम का जिक्र किया। जगत राम शास्त्री ने डा. परमार के जीवन पर प्रकाश डाला। डा. आनंद बंसल ने नारी की समाज में बिगड़ती दशा पर चिंता प्रकट की। वरिष्ठ हास्य कवि नरेंद्र मोहन रमौल ने हास्य व्यंग्य रचना ‘हमने उगा दिए फूलों में शूर’ से खूब हंसाया। इस मौके पर विधा संस्था के अध्यक्ष राजेंद्र मोहन रमौल, उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद तिवारी आदि ने डा. परमार को श्रद्धांजलि दी।
