मेडिकल पर गई शिक्षिका से चल रहा है स्कूल

डा. अनुसुया प्रसाद मैखुरी पहले गांव के प्रधान थे। अब वह विधानसभा के डिप्टी स्पीकर हैं। इन वर्षों में विकास की नई इबारत लिखी जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मैखुरी जब प्रधान थे, तो स्कूल की स्थिति बेहतर थी। अब डिप्टी स्पीकर बन गए हैं, लेकिन स्कूल बदहाल हो गया है। स्कूल पंचायत भवन में चल रहा है और वहां केवल एक शिक्षिका तैनात है। वह भी मेडिकल पर चल रही हैं। स्कूल खोलने की जिम्मेदारी निकटवर्ती चंडिका देवी जनता इंटर कालेज के ऊपर है।

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जिस गांव का प्रधान वर्तमान में विधानसभा उपाध्यक्ष हो, वहां शिक्षा की स्थिति के बारे में जायजा लेने जब सोमवार को राजकीय प्राथमिक विद्यालय मैखुरा पहुंचा तो पता चला कि स्कूल पंचायत भवन में चल रहा है।

कक्षा, ऑफिस और स्टोर बने इस कमरे में पहुंचते ही बच्चों ने जिस तरह अभिवादन किया, उससे उम्मीद की लौ नजर आई। हालांकि जब स्कूल के बारे में जानना चाहा तो पता चला कि करीब तीन वर्ष से विद्यालय पंचायत भवन के एक कमरे पर चल रहा है।

स्थायी भवन का मामला कानूनी दावपेंचों में फंसा है। विद्यालय में केवल 12 छात्र-छात्राएं ही हैं। एक शिक्षिका तैनात है, वह भी चिकित्सा अवकाश पर हैं। विद्यालय खोलने का जिम्मा चंडिका देवी जनता इंटर कालेज मैखुरा के शिक्षकों को सौंपा गया है। हैरत यह है कि पंचायत भवन पर ही गांव का आंगनबाड़ी भी संचालित हो रहा है।

खतरनाक रास्ता
भवन तक जाने का रास्ता खतरनाक है। आंगन भी पर्याप्त नहीं है। ऐसे में बच्चों के लिए खेल का मैदान की बात करना बेमानी है। इसके बाबजूद शिष्टाचार से सींचा यह बचपन देख सुनहरे भविष्य की उम्मीद जगती है, लेकिन विभाग और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को भी इनके चेहरों पर साफ पढ़ा जा सकता है।

विद्यालय की स्थिति दयनीय है। स्थायी भवन का मामला कोर्ट में लंबित है, पर विभाग बच्चों को अन्यत्र भी सुविधाएं मुहैया करा सकता था। पंचायत भवन की स्थिति भी अच्छी नहीं है, इस पर विचार किया जाना चाहिए।

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