
शिमला। मूक बधिर स्कूल ढली में वीरवार को संदिग्ध हालत में एक छात्र की मौत हो गई। 17 वर्षीय कृष्ण मानसिक रोगी और बोलने में असमर्थ था। मौत की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। प्रधानाचार्य विनय कुमारी ने बताया कि सुबह कृष्ण को जगाने वार्डन गए तो वह बेसुध मिला। उसे उपचार के लिए आईजीएमसी लाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। स्कूल के स्टाफ ने मृतक छात्र का पोेस्टमार्टम करवाने के बाद इसका हिंदु रीति रिवाज से अंतिम संस्कार किया। उधर, आईजीएमसी के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की असल वजह का पता चल पाएगा। प्रधानाचार्य ने बताया कि 2007 में कृष्ण को पुलिस यहां लाई थी। उड़ान संस्था में यह पढ़ता था, मगर छुट्टियों में यह मूक बधिर संस्थान में आता था। इसका असली नाम भी मालूम नहीं और न ही इसके घर वालों का कोई पता लग पाया है। स्कूल में ही इसका नाम कृष्ण रखा गया था। कृष्ण हां और ना के अलावा और कुछ भी बोलने में असमर्थ था और चल भी नहीं सकता था।
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व्यवस्था होती, तो बच जाती जान
स्कूल में छात्रों के स्वास्थ्य जांच के लिए बाहर से ही चिकित्सक आते हैं। स्कूल में वर्तमान में 130 के करीब मूक बधिर और नेत्रहीन छात्र अध्ययनरत हैं। मगर यहां उनके स्वास्थ्य की जांच और उपचार के लिए कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। प्राथमिक उपचार की व्यवस्था भी वार्डन अपने स्तर पर ही करते हैं इसलिए इस स्कूल में कम से कम सरकारी स्तर पर प्राथमिक उपचार की सुविधा उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। यदि ऐसी व्यवस्था होती, तो शायद कृष्ण के बीमार होने का पता पहले चल जाता और उसकी जान बच सकती थी।
