
शिमला। केंद्र सरकार से फंड न मिलने की वजह से राजधानी में मुफ्त एस्केलेटर (स्वचलित सीढ़ियां) की सवारी का सपना टूट गया है। शहरवासियों को चढ़ाई वाले स्थानों पर मुफ्त में स्वचलित सीढ़ियों की सुविधा अब नहीं मिल सकेगी। चढ़ाई से बचने के लिए लोगों को जेब ढीली करना पड़ेगी। केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग न मिलने के चलते नगर निगम ने स्वचलित सीढ़ियों के प्रोजेक्ट को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट-पार्टनरशिप) मोड पर देने का फैसला लिया है। अब स्वचलित सीढ़ियों का निर्माण बीओटी (बिल्ड एंड ऑपरेट) आधार पर किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेंट बोर्ड इस प्रोजेक्ट की डीपीआर बनाएगा। टेंडर आमंत्रित करने के समय ही सवारी का शुल्क तय कर दिया जाएगा। शहर में लिफ्ट, लोअर बाजार और लक्कड़ बाजार समेत छह जगहों पर स्वचलित सीढ़ियां लगाई जानी हैं।
करीब एक साल पूर्व इस प्रोजेक्ट को जेएनएनयूआरएम के तहत फंडिंग करवाने के दावे किए गए थे। लेकिन अब केंद्र सरकार की बेरुखी और नगर निगम की माली हालत को देखते हुए पीपीपी मोड को चुना गया है। पीपीपी मोड पर देने के चलते ठेकेदार इन सीढ़ियों का निर्माण करेगा और अपनी राशि को पूरा करने के लिए सीढ़ियां प्रयोग करने वालों से शुल्क लेगा। करीब चालीस करोड़ की राशि इस योजना के तहत व्यय की जाएगी। स्वचलित सीढ़ियां लगने से ओल्ड बस स्टैंड, लोअर बाजार और लक्कड़ बाजार बस स्टैंड से माल रोड तक पहुंचना आसान हो जाएगा।
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यहां-यहां लगेंगी स्वचलित सीढ़ियां
लिफ्ट से माल रोड वाया सब्जी मंडी
लक्कड़ बाजार/ रिवोली बस स्टैंड (सर्कुलर रोड से माल रोड)
लोअर बाजार से माल रोड इंदिरा चौक
लोअर बाजार से माल रोड नजदीक जैन मंदिर
रेलवे स्टेशन से मालरोड सर्कुलर रोड होते हुए
ऑकलैंड टनल से लक्कड़ बाजार
क्या है एस्केलेटर
स्वचलित सीढ़ियां (एस्केलेटर) चलती हुई यांत्रिक सीढ़ियां हैं। इसके अनेक भाग इस प्रकार से जुड़े हुए होते हैं कि देखने में वे सीढ़ी जैसे ही दिखाई देते हैं और उसी की तरह प्रयोग में भी लिए जा सकते हैं।
जल्द कॉल करेंगे टेंडर : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने बताया है कि फंडिंग न होने के चलते इस प्रोजेक्ट को पीपीपी मोड पर देने का फैसला लिया गया है। एचपीआईडीबी इसकी डीपीआर तैयार कर रहा है। जल्द ही टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
