
कोटद्वार। आपदा से काश्तकारों की खेती और मकानों को हुए नुकसान का मुआवजा देने की मांग को लेकर केष्टा ग्राम पंचायत के विभिन्न तोकों के ग्रामीणों ने तहसील में प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वर्ष 2009 के बाद हर वर्ष बारिश से उनकी खेती नष्ट हो रही है। शासन को लगातार सूचना भेजने के बाद भी कोई मुआवजा नहीं मिला है।
शुक्रवार को दुगड्डा विकास खंड के केष्टा ग्राम पंचायत के दऊ, ह्यूंदाऊ आदि तोकों के ग्रामीणों ने बदरीनाथ मार्ग से जुलूस निकालकर तहसील तक प्रदर्शन किया। तहसील में उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन दिया। ग्रामीणों का कहना है था कि वर्ष 2009 से लगातार भू-कटाव हो रहा है। जिससे एक ओर जहां खेती नष्ट हो रही हैं, वहीं मकानों को भी नुकसान हो रहा है। अब तक काश्तकारों की सैकड़ों नाली भूमि आपदा की चपेट की भेंट चढ़ चुकी है। शासन प्रशासन को इस बारे में कई बार लिख चुके हैं। बावजूद इसके उन्हें अब तक किसी तरह की कोई सहायता नहीं मिल पाई है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन को चेताते हुए कहा कि उनकी मांगों पर 15 सितंबर तक कोई प्रगति नहीं होने पर वे तहसील परिसर में बेमियादी धरना शुरू कर देंगे।
ग्रामीणों ने क्षेत्र में मिट्टीतेल के टैंकर को जीआईसी पोखरी तक भेजने की भी मांग की है। उनका कहना है कि यहां पर सात ग्राम पंचायतों में करीब पांच हजार यूनिट हैं। वहां से 10-15 किमी पीछे नाथूखाल, सिमल्याखाल तक ही तेल की सप्लाई हो रही है। इससे उनके डीलरों मिट्टी तेल आने का पात नहीं चल पाता।
अंधेरे में रह रहे गांवों में रोशन करने की मांग
रैली के बाद लोगों ने विद्युत वितरण खंड के ईई के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। जिसमें कहा गया है कि कई तोक ग्राम आज भी विद्युतीकरण से वंचित हैं। इसमें केष्टा के दऊ, ह्यंदाऊ, कैराकाटल, टुण्या, गवाण, राजूरगड़, ग्राम पंचायत सिमलना बिचला के पोखरीधार, उलियाल और तिमलियाल, ग्राम पंचायत चूनामहेडा के खुंडरा आौर खटपानी के परिवार अंधेरे में रह रहे हैं। उन्होंने वहां पर शीघ्र विद्युतीकरण कराने की मांग की है। ग्रामीणों ने मांगे पूरी नहीं होने पर बेमियादी अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है। ज्ञापन देने वालों में भूपेंद्र सिंह, प्रकाश, चंडीप्रसाद, ग्राम प्रधान पुष्पा देवी, प्रधान सतेश्वरी देवी, राधा देवी, राजकुमार, खुशीराम, चंद्रपाल, शंकर, सतेश्वरी, शांति देवी, मोहनलाल आदि शामिल थे।
