मुंडनेश्वर मेले में नहीं हुई पशुबलि

पौड़ी। कल्जीखाल प्रखंड के मुंडनेश्वर (खैरालिंग) महादेव मंदिर का मेला बिना पशुबलि के ही संपन्न हुआ। पशुबलि के लिए चर्चित इस मंदिर में बलि देने के लिए न तो बागी लाया गया था, न बकरियों को। मेले में पहुंचे सभी श्रद्धालुओं ने सात्विक पूजा अर्चना की।
महादेव मंदिर में थैर के ग्रामीणों ध्वजा और शीषफल चढ़ाकर पूजा अर्चना की और मेले की बृहस्पतिवार को शुरुआत हुई। मंदिर परिसर में रात्रि जागरण भी हुआ। शुक्रवार सुबह से ही मंदिर में कौथिगेरों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई। हजारों श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर खैरालिंग के दर्शन कर पूजा अर्चना की। इस दौरान मंदिर परिसर में कोई भी पशु बलि के लिए नहीं लाया। मंदिर में पहुंचे सभी लोगों ने सात्विक पूजा अर्चना की। परिसर में पकवानों से दुकानें सजी रहीं। ग्रामीण क्षेत्रों से मेले में पहुंची महिलाओं ने जमकर खरीदारी की।

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पशुबलि के लिए चर्चित था मुंडनेश्वर मेला
कल्जीखाल ब्लाक मुंडनेश्वर मंदिर में लगने वाला मेला पहले पशुबलि के लिए चर्चित था। दो दिन तक लगने वाले इस मेले में पहले दिन बकरियों की बलि दी जाती थी और दूसरे दिन बागियों यानी नर भैसों की बलि दी जाती थी। प्रशासन और सामाजिक संगठन कई सालों से मेले में पशुबलि रोकने को प्रयासरत थे। वर्ष 2005 में पशुबलि न देने को लेकर मंदिर में बवाल भी मचा था। प्रशासन और सामाजिक संगठनों के प्रयास से विगत चार साल से इस मंदिर में बागियों की बलि नहीं हो रही है। पिछले साल से तो मंदिर में बकरियों की बलि भी नहीं हो रही है। इस बार भी यह मेला बिना पशुबलि के ही संपन्न हुआ।

सबने की सात्विक पूजा
‘‘मुंडनेश्वर मेले में इस बार भी कोई भी पशुबलि नहीं हुई। मेला परिसर में बलि देने के लिए कोई पशु लेकर नहीं आया था। मंदिर में सभी लोगों ने सात्विक पूजा अर्चना की।’’ – मोहन प्रसाद काला तहसीलदार पौड़ी गढ़वाल।

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