मिलना भी जरूरी नहीं समझा राहुल गांधी ने

कर्णप्रयाग। कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आपदा प्रभावितों को कुछ देना तो दूर, मिलना भी मुनासिफ नहीं समझा। उनके आने की सूचना पर गौचर हवाई पट्टी पहुंचे लोगों को मायूसी हाथ लगी।
सोमवार रात्रि को पौन दस बजे राहुल गांधी खेड़ाखाल-खांकरा से होते हुए ऋषिकेश-बदरीनाथ राजमार्ग से गौचर आईटीबीपी गेस्ट हाउस पहुंचे। सूत्रों के अनुसार राहुल गांधी को आठ बजे राहत शिविर पहुंचना था, लेकिन वे प्रात: दस बजे हेलीकॉप्टर से केदारघाटी के लिए रवाना हो गए। बताया गया कि मौसम खराबी के चलते उनका हेलीकॉप्टर केदारनाथ में लैंड नहीं कर सका, जिसके चलते उन्हें गुप्तकाशी में लैंडिग करना पड़ा। दोपहर सवा बारह बजे उनका हेलीकॉप्टर पुन: आईटीबीपी आठवीं वाहिनी गौचर के गेस्ट हाउस पहुंचा। यहां कुछ देर ठहरने के बाद वे सड़क मार्ग से रुद्रप्रयाग के लिए रवाना हो गए। आपदा प्रभावित अमरुरुद्दीन सिद्दकी, जितेंद्र कुमार, देवेंद्र असवाल, लखपत लाल आदि का कहना था कि राहुल गांधी के आने से उम्मीदें जगी थी, लेकिन उन्होंने मिलना भी उचित नहीं समझा। पूर्व जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र मिंगवाल का कहना है कि राहुल गांधी का गौचर में रात्रि विश्राम करने और दूसरे दिन भी कई घंटे यहां ठहरने के बाद भी प्रभावितों से न मिलना अफसोस जनक है। भाजपा के वरिष्ठ नेता हरीश पुजारी का कहना है कि कांग्रेस राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी का आपदा निरीक्षण को लेकर यह दौरा पूरी तरह से निराशाजनक रहा है।

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