मिड डे मील से हो रहा स्टाफ का लंच!

शिमला। स्कूलों में बच्चों को परोसे जाने वाले मिड डे मील से ही स्टाफ का लंच हो रहा है! राजधानी में राज्य के मॉडल स्कूल का ये हाल है तो दूर-दूराज के स्कूलों में शिक्षा विभाग का मिड डे मील में कितना नियंत्रण है इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। मंगलवार को छात्राओं के सबसे बड़े स्कूल पोर्टमोर में दोपहर बाद 1:50 बजे तक खाना परोस दिया गया। यहां छात्राओं को पंक्तिबद्ध बैठने की कोई व्यवस्था नहीं। कुछ छात्राएं हाथ में टिफिन और थाली लेकर सीढ़ियों में बैठकर दाल-चावल खा रही हैं तो कुछ कक्षाओं में बैठकर। किचन में पानी का फिल्टर भी बंद पड़ा है। स्टाफ के कुछ लोग मिड डे मील का खाना प्लेट में भरकर खाने में मशगूल हैं। मिड डे मील की इंचार्ज शिक्षिका कौशल्या मांटा अपने कैबिन में बैठकर घर से लाया लंच कर रही हैं। बाहर क्या हो रहा है इसका इन्हें कोई जानकारी नहीं? स्कूल के प्रधानाचार्य डा. देवेंद्र दत्त कश्यप भी इस बात से अंजान हैं कि बाहर सब अव्यवस्थित है। बच्चों का भोजन स्टाफ के कुछ लोग भी खा रहे हैं। हालांकि कश्यप ने कहा कि किचन के फर्श सहित व्यवस्था में सुधार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूल प्रबंधन समिति की बैठक में सभी समस्याओं पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि स्टाफ के भोजन करने के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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मजाक बन गया मेन्यू
तय मेन्यू के मुताबिक मंगलवार को स्कूल में मीठे चावल, किशमिश के साथ परोसे जाने थे लेकिन बच्चों को परोस दिए दाल और चावल। कहा गया कि स्कूल प्रबंधन समिति के फैसले के मुताबिक ही छात्राओं को दाल और चावल बनाकर खिलाए जा रहे हैं।
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शौचालय से सटा है किचन
शिमला। प्राथमिक पाठशाला पोर्टमोर का किचन शौचालय के साथ सटा है। किचन की हालत बेहद खराब है। अंदर फर्श टूटा हुआ है। दीवारों में सीलन है और भीतर तेज दुर्गंध है। बताया गया कि किचन शेड से सामान चोरी होने की शिकायतें आने पर सामान वर्तमान कमरे में बदला गया। इसको सुरक्षित जगह शिफ्ट किए जाने का मामला विभाग की मंजूरी को भेजा गया है। मुख्याध्यापक संजीव जिस्टू ने कहा कि किचन शौचालय के नजदीक बना हुआ है, जो गलत है। उन्होंने हाल ही में स्कूल में ज्वाइन किया है। इसे जल्द ही सुरक्षित और साफ जगह पर शिफ्ट किया जाएगा।

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