
रुड़की। खून-पसीना एक कर गन्ने की फसल उगाई। तैयार होने पर लगा कि फसल बेचकर अब दुख-दर्द कुछ हद तक कम हो जाएंगे। किसी ने अधूरे मकान को पूरा करने का सपना देेखा तो किसी ने इलाज करवाकर बीमारी से मुक्ति पाने का। कोई मां का इलाज करवाना चाहता है, लेकिन चीनी मिलों ने 124 करोड़ रुपये का भुगतान लटकाकर किसानों को मुश्किल में डाल दिया।
आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसानों की स्थिति यहां तक पहुंच गई है कि उनके पास नई फसल को रोग की चपेट में आने से बचाने के लिए भी पैसा नहीं है। अपनी मेहनत की कमाई पाने के लिए उन्हें धरना देना पड़ रहा है। वहीं, शासन-प्रशासन ने भी किसानों को हाशिए पर डाल रखा है। किसानों का भुगतान करने के लिए चीनी मिलों को ऋण देने की बात लंबे समय से की जा रही है। मंत्री से लेकर सांसद तक आश्वासन दे चुके हैं कि सरकार मिलों को ऋण देगी, जिससे किसानों का भुगतान होगा, लेकिन यह आश्वासन कब पूरा होगा कोई नहीं जानता।
15 दिन में भुगतान का है नियम
नियमानुसार 15 दिनों में गन्ने का भुगतान किया जाना चाहिए, लेकिन जिले की शुगर मिलें इस प्र्रावधान का मजाक उड़ा रही हैं। 15 दिन के बजाय कई माह बाद भी भुगतान नहीं किया जा रहा है। भुगतान नहीं होने से किसानों के कई जरूरी काम अटक गए हैं, लेकिन शासन-प्रशासन भी भुगतान कराए जाने के बजाय किसानों को आश्वासन देने तक ही सिमट कर रह गया है। इन हालतों में किसान की आने वाली पीढ़ी खेतीबाड़ी से मुंह फेर रही है।
किसानों की पीड़ा
शुगर का बीमार हूं, दिल्ली में उपचार चल रहा है, लेकिन अब दिल्ली जाने तक के पैसे नहीं बचे हैं। इस कारण इलाज बीच में रुक गया है। अगर भुगतान हो जाता तो इलाज चलता रहता।
– कनक सिंह, शेरपुर खेलमऊ
फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित हूं, मुजफ्फरनगर में इलाज चल रहा है, लेकिन पैसा नहीं होने से उपचार प्रभावित हो रहा है। मिलों को जल्द भुगतान करना चाहिए।
– शेर सिंह, कगवाली
माताजी बीमार चल रही हैं। सोच रहा हूं किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराऊं, लेकिन पैसे के अभाव में समस्या पैदा हो रही है। अब भुगतान होने के बाद ही इस बारे में सोचा जाएगा।
– इंद्रजीत, खेड़ाजट
पिछले महीनों मकान बनाने का काम शुरू किया था, लेकिन गन्ना भुगतान नहीं होने से निर्माण कार्य बीच में ही रुका पड़ा हुआ है। अब भुगतान होने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा।
– नित्तरपाल, नारसन खुर्द
खेतीबाड़ी के लिए भैंसा खरीदना है, लेकिन गन्ना भुगतान नहीं होने से आज तक भैंसा नहीं खरीद सका हूं। भुगतान का इंतजार है।
– ऋषिपाल, नारसन कलां
तैयार फसलों में रोग लग गया है, लेकिन पैसों की कमी के चलते फसल को बचाने के लिए कीटनाशक खरीदने तक पैसा नहीं है। पुरानी फसल के भुगतान के चक्क र नई फसल भी प्रभावित हो रही है।
– निर्दोश, थोई
किस मिल पर कितना बकाया
मिल – बकाया भुगतान- भुगतान किया
इकबालपुर – 51 करोड़ – 10 फरवरी तक
लिब्बरहेड़ी – 53 करोड़ – 20 फरवरी तक
लक्सर – 50 करोड़ – 15 मार्च तक
कुल बकाया – 154 करोड़ रुपये
मिलों के पास पैसा नहीं, सरकार ने नहीं दिया पैकेज
14 अगस्त को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सोनिका ने किसानों और मिल प्रबंधन के बीच वार्ता में 27 अगस्त को भुगतान कराए जाने का आश्वासन भाकियू को दिया था। चीनी मिलों ने भी प्रशासन के दबाव में आकर किसानों को भुगतान कराने का आश्वासन तो दे दिया, लेकिन अब प्रशासन के लिए मिलों से बकाया गन्ना भुगतान कराना आसान नहीं होगा, वजह सरकार की ओर से मिलों को भुगतान के लिए कोई पैकेज नहीं दिया जाना। वहीं शुगर मिल पहले से ही पैसा नहीं होने का रोना रो रहे हैं।
वर्जन
किसानों की परेशानी को देखते हुए मिल पर बकाया गन्ने का भुगतान दस दिन में कर दिया जाएगा।
– कामेश कुमार, गन्ना प्रबंधक लक्सर शुगर मिल
सरकार की ओर से पैकेज मिलते ही किसानों का गन्ना भुगतान कर दिया जाएगा। पैकेज जल्द मिलने की उम्मीद है।
– पवन तोमर, जनसंपर्क अधिकारी, इकबालपुर शुगर मिल
सरकार की ओर से ऋण के लिए शासनादेश जैसे ही मिल जाएगा। ऋण लेने के बाद गन्ना भुगतान किया जाएगा।
