
सिहुंता (चंबा)। हर्बल पर आधारित इलेक्ट्रोहोम्योपैथी चिकित्सा पद्धति पर महाराष्ट्र के महाबलेवर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस शिविर में हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक चिकित्स्क संघ के अध्यक्ष डा. सुरेंद्र ठाकुर और देश के प्रसिद्ध इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक डा. संजीव शर्मा प्रदेश का प्रतिनिधित्व करेंगे। प्रदेश महासचिव डा. रजनीश शर्मा और जिलाध्यक्ष डा. अशोक भारद्वाज ने बताया कि महाबलेश्वर में होने वाले कार्यक्रम में देशभर के इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक विशेषज्ञों के अलावा वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के प्रतिनिधि भी भाग लेंगे। डा. रजनीश शर्मा ने बताया कि डा. संजीव शर्मा ने इटली में जाकर इलेक्ट्रोहोम्योपैथी के सभी तथ्यों का गहनता से अध्ययन कर भारत में वैज्ञानिक मानकों पर स्थापित किया है। इलेक्ट्रोहोम्योपैथी विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से प्रमाणित चिकित्सा पद्धति है। इसे भारत सरकार की ओर से मान्यता प्रदान करने के लिए प्रयास जारी है। महासचिव ने कहा कि इस पद्धति में चिकित्सा के लिए कानूनी तौर पर कोई पाबंदी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में असाध्य बीमारियों का इलाज पूरी तरह संभव है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक वन औषधियों से निकाले स्पैज्रिक ऐशेंस में अचूक शक्ति होती है, जो किसी भी कोशिका तक पहुंचकर अरोग्यता प्रदान करती है। डा. अशोक भारद्वाज ने बताया कि जिला चंबा में फलोरा विश्व का सर्वश्रेष्ठ भंडार है। इससे प्रदेश को सर्वाधिक आय हो सकती है। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय संगोष्ठी 27 से शुरू होगी। इसके लिए हिमाचल की टीम 25 अप्रैल को प्रस्थान करेगी।
