
शिमला। प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की किताबें इस बार महंगी मिलेंगी। किताबों के रेट में बढ़ोतरी के फैसले का भार अभिभावकों को इस सत्र से वहन करना होगा। बोर्ड के नए निर्धारित रेट से किताबें मार्केट बिकना शुरू हो गई हैं। बोर्ड से संबद्ध लगभग तीन हजार स्कूलों के हजारों बच्चों के अभिभावकों को इसका झटका लगेगा। नए रेट पर किताबें खरीदकर सरकारी स्कूलों में वितरित करने को एसएसए और शिक्षा विभाग को अतिरिक्त बजट का प्रावधान करना पड़ेगा। पहली से आठवीं की किताबों के दामों में इजाफा हुआ है। बोर्ड ने बीते सत्र में अगस्त माह में किताबों के रेट में बढ़ोतरी की थी। नए सत्र के लिए पहली बार नए रेट पर किताबें बेची जा रही हैं। एकमुश्त 40 फीसदी की बढ़ोतरी से औसतन हर कक्षा के सेट के रेट में सौ से डेढ़ सौ रुपये फर्क पड़ेगा। बोर्ड की ओर से तय नए रेट की किताबें मार्केट में फिलहाल पुराने रेट की छपी किताबें दी जा रही हैं। इसमें 30 रुपये की किताब का रेट 50 रुपये हो चुका है। किताब को नए रेट में बेचना कारोबारियों के लिए मुश्किल हो रहा है।
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डाइट से उठी बजट बढ़ोतरी की मांग
किताबों के रेट बढ़ने के बाद सभी जिला के सर्व शिक्षा अभियान परियोजना कार्यालयों से वितरित की जाने वाली किताबों की खरीद को अतिरिक्त बजट की जरूरत होगी। एसएसए जिला परियोजना अधिकारी सीपी गरेड़ा ने माना कि रेट बढ़े हैं। 22 फरवरी को संभावित कार्यकारी परिषद की बैठक में मामला उठना तय है। सरकार, शिक्षा विभाग को एसएसए, आईआरडीपी, एससी, एसटी वर्ग के छात्रों में वितरण को किताबें खरीदने को अतिरिक्त बजट प्रावधान करना पड़ेगा।
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एसएसए देता है मुफ्त किताबें
सरकारी स्कूलों में पहली से आठवीं तक के बच्चों के लिए एसएसए के बजट से किताबें दी जाती हैं।
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एनसीईआरटी के मुताबिक बढ़ाए रेट : तेगटा
स्कूल शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन बलबीर तेगटा का कहना है कि अगस्त में रेट बढ़ाए गए थे। इस सत्र में रेट नहीं बढ़े हैं। किताबों के रेट एनसीईआरटी के मुताबिक ही बढ़ाए जाते हैं।
