
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में लापरवाही की सारी हदें लांघी जा रही हैं। पहले से ही कई विवादों से घिरे आईजीएमसी में एक ऐसा ही वाक्या पेश आया। मरीज का ब्लड ग्रुप ए नेगटिव है और डाक्टर ने बिना जांच फार्म पर ओ नेगटिव लिखकर दे दिया। मरीज का आपरेशन होना है और इसके लिए तीमारदार से ओ नेगटिव ब्लड की छह यूनिट का इंतजाम करने को कहा गया। लापरवाही के कारण मरीज का ब्लड चढ़ने के बाद ऊपर पहुंचाने का इंतजाम हो गया था लेकिन ब्लड बैंक ने ब्लड ग्रुप को क्रास मैच कर यह पता लगा लिया कि मरीज का ब्लड ग्रुप ओ नहीं ए नेगटिव है। इस कारण मंगलवार को रखा गया हिप ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का आपरेशन टाल दिया गया।
यह कहता है नियम
मरीज को ब्लड की जरूरत है तो डाक्टर ब्लड सैंपल लेगा और फार्म भरकर ब्लड बैंक में ब्लड ग्रुुप और क्रास मैच के लिए भेज देगा। ब्लड बैंक ही मरीज का ब्लड ग्रुप जांच के बाद बताएगा। अगर मरीज या तीमारदार खुद भी डाक्टर को अपना ब्लड ग्रुप बताए तब भी डाक्टर फार्म पर ब्लड ग्रुप नहीं लिख सकता, उसे जांचने के लिए ब्लड बैंक में भेजना जरूरी होता है।
डाक्टर ने कहा, तीमारदार ने बताया
फार्म पर गलत ब्लड ग्रुप लिखने वाले डाक्टर ने कहा कि तीमारदार ने उन्हें ओ ब्लड ग्रुप के बारे में बताया था, उसके बाद ही उसने लिखा। तीमारदार का कहना है कि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं कहा। उनसे खुद डाक्टर ने ओ नेगटिव के छह यूनिट ब्लड के इंतजाम करने के लिए कहा गया था।
मुख्यमंत्री राहत कोष से मिला है इलाज को पैसा
मरीज का हिप ज्वाइंट रिप्लेस होना है। इलाज के लिए करीब दो लाख रुपये खर्च होने हैं। मुख्यमंत्री राहत कोष से पैसा उपचार के लिए आया है। विवाद सामने आने के बाद अब बुधवार को आपरेशन की तारीख रखी गई है।
मामला गंभीर, जांच के आदेश
अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. रमेश ने कहा कि मामला गंभीर है। उनके ध्यान में मामला आने के बाद प्रबंधन की ओर से क्षमा मांग चुके हैं। डाक्टर का कहना है कि तीमारदार के कहने पर ओ नेगेटिव लिखा है। सच्चाई क्या है, इसका पता लगाया जा रहा है। मामले की जांच के निर्देश दे दिए गए हैं।
