मनरेगा घोटाला : कैश बुक भी फर्जी!

देहरागोपीपुर (कांगड़ा)। परागपुर ब्लॉक में फर्जी तरीके से चेकों पर हस्ताक्षर करके लाखों के गोलमाल के मामले में विभागीय जांच टीम ने खंड कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। जांच टीम के सामने एक महिला बीडीओ ने अपने कार्यकाल में अधिकतर कैश बुक पर साइन करने की बात मानी है। जबकि, मनरेगा योजना की कैश बुक के पृष्ठ संख्या 93, 94 और 95 पर साइन होने से इंकार किया है। जिस पर जांच टीम ने संबंधित कैश बुक की जांच फोरेंसिक लैब में करवाने की बात कही है। टीम को संदेह है कि संबंधित पृष्ठ संख्या के पृष्ठ फर्जी हो सकते हैं। इसी तरह जांच टीम ने कैश बुक की पृष्ठ संख्या 110, 111, 123, 137 और 138 पर भी संदेह जताकर इसे फर्जी माना है। जांच टीम ने पाया कि संबंधित बैंक ने माना है कि चेकों के जरिये करीब 7 लाख 15 हजार रुपये विभिन्न पंचायतों को देने के लिए निकाले गए थे। लेकिन, कैश बुक में इसका जिक्र तक नही हैं और न ही इनके बाउचरों का कोई रिकार्ड है। इसके अलावा पाया गया कि कुछ कथित तौर पर फर्जी बाउचरों का इस्तेमाल किया गया है। लेकिन, तकनीकी सहायकों ने करीब 4 लाख 49 हजार 374 रुपये और ग्राम रोजगार सेवकों ने 1 लाख 32 हजार 695 रुपये उन्हें मिलने से इंकार किया है। इस पर भी संदेह जताया गया है। इसके अलावा कई अन्य कार्यों की एवज में अदायगी के लिए राशि तो जारी हुई, लेकिन संबंधित व्यक्ति ने इन्हें मिलने से इंकार किया है। फोटो स्टेट करवाने की एवज में संबंधित दुकानदार के बिल पर कटिंग होने पर भी संदेह है।

एक ही फर्म से बनाए दर्जनों साइन बोर्ड
इसी तरह के एक मामले में मनरेगा के कार्य दर्शाने के लिए विभिन्न पंचायतों में लगाने के लिए दर्जनों साइन बोर्ड एक फर्म से बनवाए गए। इन्हें बनवाने के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों ने कोई मांग नहीं की थी। यही नहीं इन्हें बनवाने के लिए किसी प्रकार की कोटेशन नहीं मांगी गई और न ही टेंडर प्रक्रिया हुई। बावजूद इसके लाखों की अदायगी कर दी गई। इस संदर्भ में डीएसपी देहरा बीडी भाटिया ने कहा कि पुलिस मामले के हर पहलू को मद्देनजर रखते हुए जांच कर रही है। भ्रष्टाचार के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

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