
सांगला (किन्नौर)। प्राकृतिक आपदा के बावजूद किन्नौर में वीरवार को हुए उपचुनाव में यहां के लोगों ने भारी उत्साह दिखाया। सड़क सुविधा से वंचित कई लोग किसी तरह सुबह अपने घरों से निकल कर मतदान केंद्रों तक पहुंचे और मताधिकार का इस्तेमाल किया। कई लोगों को पीठ पर उठाकर मतदान केंद्रों तक पहुंचाया गया। मतदान को लेकर लोगों में मंडी जिले की जनता की अपेक्षा अधिक उत्साह रहा। किन्नौर कुल मिलाकर 54 फीसदी मतदान हुआ। दोपहर तक सांगला में 45 फीसदी वोटिंग हो चुकी थी। सांगला में सोलह मतदान केंद्रों में वोटिंग की जा रही थी। दोपहर तक लोगों ने 45 फीसदी वोट डाल दिए थे। लेकिन, दोपहर बाद बारिश शुरू होने के बाद मतदान केंद्रों में लोगों का पहुंचाना कम हो गया। इसके बाद भी सांगला में करीब 51 फीसदी मतदान हुआ। जिले के कल्पा खंड के तहत आने वाले वाले सांगला तहसील के छितकुल, रकछम, बटसेरी, बौनिंगसारिंग, थापासारिंग सांगला-1, सांगला-2, कामरू, कुप्पा, चांसु, शौंग, बरुआ, सापनी, कनई, कड़छम और किल्बा के सभी 16 मतदान केंद्रों में दोपहर तक करीब 45 फीसदी मतदान हो चुका था। लेकिन, उसके बाद हल्की बारिश के चलते लोगों की भीड़ कम हो गई। नायब तहसीलदार इलेक्शन हरबख्श सिंह ने बताया कि सांगला में 51 फीसदी वोटिंग हुई है।
हालांकि विधानसभा चुनाव में किन्नौर में 74 फीसदी मतदान हुआ है। लेकिन, क्षेत्र में भारी बारिश के चलते उपचुनाव में मतदान कम ही रहा। सुभाष चंद और उनकी पत्नी रतना नेगी ने बताया कि 16 जून से वे शलखर में फंसे थे। इससे वे वोट देने नहीं जा सके। महेश कुमार का कहना है कि वह अपनी भेड़-बकरियों के साथ फंसे थे। उन्होंने आठ किमी लंबा सफर कर पूह में वोट डाला। इसके अलावा कांग्रेस प्रवक्ता डा. सूर्य बोरस भी अपने मत का प्रयोग नहीं कर पाए। वह कई दिन से रिकांगपिओ में फंसे हुए हैं। बटसेरी के सुंदर नेगी को उनके परिवार के सदस्य पीठ पर उठा कर मतदान केंद्र बटसेरी तक लाए। वहीं, हिम्मत राय नेगी, बुद्धि सिंह, राजेश नेगी कहना है कि सड़क बंद होने के बाद भी वे कई किमी पैदल रास्ता चल कर बटसेरी के मतदान केंद्र पर वोट डालने पहुंचे।
