मडी जिले में बारिश से करोड़ों की क्षति

मंडी। मंडी जिले में भारी बारिश से अब तक करोड़ों का नुकसान हो चुका है। जिला प्रशासन के साथ ही लोक निर्माण, आईपीएच और विद्युत विभाग ने बारिश से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार को सरकार को भेज दी है। आसमान से बरसी आफत से सरकारी और निजी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ है। फौरी राहत के बाद नुकसान की भरपाई के लिए प्रभावित लोग उचित मुआवजे की आस लगाए बैठे हैं। बारिश से कई परिवारों के घर ध्वस्त हो गए। इसके अलावा खड्डों और नालों के साथ लगते किसानों की जमीनें बह गई हैं।
इस मानसून सीजन में अब तक भारी बारिश से करोड़ों का नुकसान हो चुका है। हालांकि अभी तक आसमान से बरस रही आफत का कहर थमा नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से दस विधानसभा क्षेत्रों में बारिश से करीब 126 करोड़ का नुकसान आंका गया। इसके अलावा बारिश से लोक निर्माण विभाग को भी काफी चपत लगी है। लोनिवि के मंडी जोन में ही करीब 140 करोड़ के नुकसान का आकलन किया गया है। वहीं, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग मंडी जोन के तहत पेयजल स्कीम और पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से 19.67 करोड़ का नुकसान अब तक हो चुका है। विद्युत विभाग के मंडी डिवीजन के तहत करीब 90 लाख का नुकसान हुआ है।
जिला मंडी में इस बार सबसे ज्यादा नुकसान धर्मपुर क्षेत्र की भरौरी पंचायत के सतरेहड़, मठी बनवार, जंगेल, जोगिंद्रनगर क्षेत्र के कुंडनी, सिराज घाटी के बगस्याड़, द्रंग विधानसभा क्षेत्र के उत्तरशाल क्षेत्र की सेगली पंचायत के बागी गांव में भारी नुकसान हुआ है।
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क्या कहना है प्रशासन का
कार्यकारी उपायुक्त गोपाल चंद ने कहा कि भारी बारिश से अब तक जिला में 126 करोड़ का नुकसान हो चुका है। राजस्व विभाग ने नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट सरकार को भेज दी है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को फौरी राहत प्रदान की जा चुकी है।

आईपीएच और लोनिवि अधिकारी बोले
लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता विजय कपूर का कहना है कि मंडी जोन के तहत विभाग को 140 करोड़ का नुकसान हुआ है। बारिश से सड़कें, पुल क्षतिग्रस्त हो गए। आईपीएच विभाग मंडी के मुख्य अभियंता आरपी टंडन ने भारी बारिश से पेयजल स्कीम और लाइन क्षतिग्र्रस्त हुई। इससे करीब 19.67 करोड़ का नुकसान आंका गया है। विद्युत विभाग मंडी के अधिशासी अभियंता देश राज ने बताया कि मंडी डिवीजन में बारिश से 90 लाख का नुकसान हुआ है।

अब तक के नुकसान का ब्यौरा
विभाग नुकसान
राजस्व विभाग 126 करोड़
पीडब्ल्यूडी 140 करोड़
आईपीएच 19.67 करोड़
विद्युत विभाग 90 लाख

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