मटमैले पानी की जांच कराने में जुटे लोग

शिमला। शहर में पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच के लिए सौ रुपये फीस लगेगी। नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा में लैबोरेटरी में पानी की जांच की जाती है। 48 घंटे के भीतर जांच रिपोर्ट देने का दावा निगम प्रशासन ने किया है। मटमैले पानी की सप्लाई से जूझ रहे शहर के लोगों ने सोमवार को पानी के सैंपल जांच के लिए दिए हैं।
सोमवार को हिमलैंड, छोटा शिमला और कसुम्पटी के लोगों ने पानी के सैंपल जांच के लिए नगर निगम को दिए हैं। हिमलैंड के सुरेश कुमार, छोटा शिमला से पवन शर्मा और कसुम्पटी के बलदेव ठाकुर ने बताया कि उनके घरों में एक सप्ताह से मटमैले पानी की सप्लाई हो रही है। बरसात के मौसम में पानी में कीटाणुओं के होने का भय भी सता रहा है। इसके चलते उन्होंने पानी के सैंपल जांच के लिए दिए हैं। उधर, मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. उमेश कुमार भारती ने कहा कि कोई भी शहरवासी पानी के सैंपल जांच के लिए एमसी में दे सकता है। इसके लिए सौ रुपये शुल्क लगेगा।

2007, 10 और 13 में फैला पीलिया
शिमला शहर में वर्ष 2007, 2010 और 2013 में पीलिया के ज्यादा मामले सामने आए हैं। जिन स्थानों पर इसके ज्यादा केस पाए गए, वहां पेयजल की सप्लाई अश्वनी खड्ड से दी जाती है।

सब ग्रुप भी उठा चुका है सवाल
पीलिया फैलने के कारणों की जांच के लिए आईपीएच ने इस साल सब ग्रुप गठित किया था। ग्रुप द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में अश्वनी खड्ड के पानी पर सवाल उठाए गए हैं।

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