
रामपुर बुशहर। किन्नू पंचायत के रूनपू गांव के लोगों का सड़क से जुड़ने का सपना न जाने कब साकार होगा? यहां के लिए सड़क का कार्य वर्ष 2000 से शुरू हो चुका है, लेकिन सरकारी उपेक्षा के चलते कार्य आज तक पूरा नहीं हो पाया। तेरह वर्ष में यहां के लिए कुल आठ किमी में से केवल दो किमी सड़क ही बन पाई है। ऐसे में यहां के लोग खाद्य सामग्री समेत अन्य सामान पीठ पर ढोने के लिए विवश हैं। वहीं, सेब सीजन में लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
सड़क न होने से रूपनू गांव से सेब की पेटियां स्पैन के माध्यम से मुख्य सड़क तक पहुंचाई जाती हैं। एक पेटी को सड़क तक ले जाने का किराया 30 से 40 रुपये लिया जाता है। इससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि लोगों को प्रति पेटी कितना नुकसान उठाना पड़ता है। किन्नू पंचायत उपप्रधान लाल सिंह डिंगटू ने बताया कि रूनपू और छोटा रूनपू में अधिकांश बागवान हैं। यहां से हजारों पेटी सेब होता है, लेकिन सड़क के अभाव में लोगों को सेब को मुख्य सड़क तक पहुंचाने में भारी भरकम राशि खर्च करनी पड़ती है। अगर सरकार सड़क की सुविधा दे तो लोग सेब से अच्छी खासी आय कमा सकते हैं। लेकिन इसे सरकार या विभाग की लापरवाही ही कहा जाएगा कि रूपनू के लिए तेरह वर्ष में केवल दो किमी सड़क ही बन पाई है, जो वाहनों के लायक नहीं है। उपप्रधान समेत स्थानीय निवासी ईश्वरी नंद बरोगी, कैलाश चंद, कला देवी, चेतराम, चंपा देवी, शीला, सुशीला और कौशल्या ने भी सड़क के कार्य में लापरवाही बरते जाने पर रोष जताया है। मांग की है कि कार्य में तेजी लाई जाए। लोगों ने प्रशासन से स्पैन के माध्यम से पेटियों की ढुलाई के रेट तय करने की मांग भी की है।
