मंदिरों में नहीं हो रहा परंपराओं का निर्वहन

रुद्रप्रयाग। ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी माधवाश्रम महाराज ने कहा कि सनातन संस्कृति, धर्म और आध्यात्मिक विरासत के साथ ही नैतिक मूल्यों में गिरावट आ रही है।
उत्तराखंड स्थित देवधामों में जल प्रलय के कारणों को बताते हुए उन्होंने कहा कि मर्यादाओं का उल्लंघन हो रहा है। मंदिरों की प्राचीन परंपराओं का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं हो रहा है। केदारनाथ को गाय के दूध से धोया जाता था। अब ऐसा नहीं हो रहा है।
पत्रकार वार्ता में उन्होंने बताया कि केदारनाथ में भगवान शिव का स्वयंभू लिंग है। ऐसे में कुछ लोगों द्वारा पांच वर्ष पूर्व धाम में एक और लिंग की स्थापना की गई। भगवान के साथ राजनीति नहीं की जानी चाहिए। मंदिर के कपाट खुलने के बाद हड़तालियों द्वारा मंदिर के दरवाजे बंद करना गलत था। घोडे़-खच्चर और डंडी-कंडी को रोकने से श्रद्धालु परेशान थे। यदि लोगों को सरकार से कोई मांग करनी थी, तो कपाट खुलने से पूर्व आंदोलन करना चाहिए था।
उन्होंने कहा कि मृतकों का अंतिम संस्कार वैदिक परंपरानुसार होना चाहिए। केदारनाथ में ही उनका वैदिक कर्मकांड संस्कार होने चाहिए। जो लोग अपने परिजनों के शव ले जाने चाहते हैं, उनको शव ले जाने दिया जाए। केदारनाथ में पुन: पूजा-अर्चना शुरू किए जाने से पूर्व शुद्धिकरण और सकलीकरण की प्रक्रिया होनी आवश्यक है।

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