
मंडी। ग्रामीण हस्तशिल्प और दस्तकारी अब ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाएगी। प्रदेश के मंडी और सिरमौर जिले की ग्रामीण महिलाओं को शत प्रतिशत स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा जाएगा। जिससे महिलाएं इन समूहों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के अलावा आर्थिक रूप से भी आत्मनिर्भर हो सकेंगी। इसके लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की ओर से पायलट प्रोजेक्ट के रूप में प्रदेश के दो जिलों को चुना गया है। इनमें मंडी और सिरमौर शामिल हैं। इसके पश्चात इन समूहों को क्षेत्र के आधार पर उनकी जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे वे आर्थिक रूप से निर्भर हो सकें। मंडी में स्वयंसेवी संस्था मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति की ओर से नाबार्ड के सहयोग से इस वर्ष 1500 स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जाएगा। जिसमें जिले की करीब 15000 महिलाओं को शामिल किया जाएगा। उन्हें एरिया के हिसाब से उनकी जरूरतों को देखते हुए डेयरी, अचार, जैम जैली, स्थानीय उत्पादों के आधार पर वस्तुएं बनाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन से पांच साल तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी को सुधारने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्र की ओर से मदद की जाएगी। जिसका प्रारूप सर्वेक्षण के पश्चात तैयार किया जाएगा। मंडी साक्षरता एवं जन विकास समिति के परियोजना समन्वयक भीम सिंह के अनुसार ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक हालत को सुधारने के लिए केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश के मंडी और सिरमौर जिलों को चुना गया है। स्वयं सहायता समूहों के गठन के बाद स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्रोजेक्ट तैयार कर नाबार्ड को भेजा जाएगा। इन समूहों के बैंक में खाते खोलकर उन्हें बैंकों से लिंक किया जाएगा। वहीं, उनके उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने की भी व्यवस्था की जाएगी।
