
शिमला। हिमाचल हाईकोर्ट ने मंडी शहर में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए 20 भवनों को तुरंत गिराने के आदेश दिए हैं। अदालत ने उक्त आदेश उन मामलों में दिए, जिनकी कोई अदालती कार्यवाही लंबित नहीं है। अदालत ने जिलाधीश और एसपी मंडी को आदेश दिए हैं कि वे भवन गिराने के लिए नगर परिषद मंडी को हर संभव सहायता प्रदान करें।
मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायाधीश आरबी मिश्रा की खंडपीठ ने नगर परिषद मंडी के संबंधित अधिकारियों को आदेश दिए कि वे भवनों को गिराने पर हुए खर्चे को उन्हीं भवन मालिकों से वसूल करें। अदालत ने नगर परिषद के अफसरों को चेतावनी दी है कि यदि इन आदेशों पर कोई लापरवाही बरती गई तो उसे गंभीरता से लिया जाएगा। अदालत ने कहा कि मामले की आगामी सुनवाई में वर्ष 2009 से अब तक अवैध कब्जों को संरक्षण देने में संलिप्त दोषी अधिकारियों के खिलाफ उचित कार्यवाही करने पर निर्णय लिया जाएगा।
गौरतलब है कि वर्ष 2009 में हाईकोर्ट ने एक आयोग का गठन कर अवैध कब्जों की जांच का जिम्मा बीआर कौंडल को सौंपा था। आयोग की रिपोर्ट के अनुसार उन्हें केवल 51 मामले ही जांच के लिए सौंपे गए थे। उन्होंने निशानदेही के दौरान पाया कि मंडी शहर में बहुत से अवैध कब्जे हैं जिन्हें नगर परिषद ने हाईकोर्ट से छिपाया है। आयोग के अनुसार वर्ष 2009 में कुल 288 अवैध कब्जे थे जिनमें से अधिकतर मामलों को नगर परिषद मंडी के अधिकारी दबाने की कोशिश करते रहे। अदालत ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया कि नगर परिषद मंडी के अधिकारी एक तो संवैधानिक कर्त्तव्यों का निर्वहन करने में असफल रहे और साथ ही अदालत के आदेशों की अनुपालना करने में भी असमर्थ रहे। इन अफसरों की लापरवाही पर आगामी सुनवाई में निर्णय लिया जाएगा। मामले की सुनवाई अब 31 अगस्त को होगी।
