
नूरपुर (कांगड़ा)। बाहरी राज्यों की मंडियों में अपनी खास पहचान बनाने वाला कांगड़ा का आम इस बार घरेलू मंडियों से भी गायब है। ऑफ ईयर के चलते इस बार आम की पैदावार में अव्वल कांगड़ा जिले में करीब 70 फीसदी कम फसल होने का अनुमान है। जबकि पिछले साल जिला कांगड़ा में 16,345 मीट्रिक टन आम का उत्पादन हुआ था।
मौजूदा समय में आम की फसल बाजार में उतर चुकी है। लेकिन मौसम की मार के चलते आम का पहले वाला स्वाद व आकार देखने को नहीं मिल पा रहा है। आम का गढ़ कहे जाने वाले नूरपुर उपमंडल में इस बार आम की फसल टूटने से जहां बागवानों को घाटा उठाना पड़ा है। तो वहीं, हर साल आम की फसल को बगीचों से मंडियों तक पहुंचाने वाले ट्रक, टैंपों व जीप आपरेटरों का धंधा भी चौपट हुआ है। जिला कांगड़ा में नूरपुर व इंदौरा समेत नगरोटा बगवां, फतेहपुर, देहरा, नगरोटा सूरियां, लंबागांव व बैजनाथ के निचले मैदानी इलाके आम की पैदावार में अग्रणी माने जाते हैं। जहां से हर साल करोड़ों रुपये का आम पठानकोट, अमृतसर, श्रीनगर, गंगानगर, जम्मू, गुरदासपुर, चंडीगढ़, कांगड़ा, हमीरपुर, कुल्लू व पालमपुर की मंडियों में भेजा जाता है। यह सिलसिला डेढ़ से दो माह तक चलता है और इससे ट्रक व जीप आपरेटर भी मोटी कमाई करते हैं। लेकिन इस बार आम की फसल टूटने से बागवानों समेत फसल की ढुलाई करने वाले ट्रक आपरेटरों को भी आर्थिक तौर पर झटका लगा है।
क्षेत्र के बागवान योगराज सिंह, मंगल सिंह, चैन सिंह, सुभाष पठानिया, दर्शन सिंह, जतिंद्र पठानिया, बहादुर सिंह, विभीषण जंवाल इत्यादि ने बताया कि प्रति हेक्टेयर आम की फसल से करीब दो से ढाई लाख रुपये का मुनाफा होता है। लेकिन इस बार करीब 80 फीसदी उत्पादन कम होने से करोड़ों रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। उद्यान विभाग के उपनिदेशक डा. डीएस राणा ने माना कि इस बार ऑफ ईयर के चलते आम के उत्पादन में करीब 70 फीसदी गिरावट का अनुमान है।
