
शिमला ( वीरेन्द्र खागटा)

सीबीआई को मिले पुख्ता सबूत
जांच में पता चला है कि बीआरओ के अफसरों ने सड़क निर्माण के लिए आए करोड़ों रुपयों में से मोटी रकम अपने खाते में जमा कर ली।
जब्त रिकॉर्ड और कैशबुक से इसके सबूत मिले हैं। करोड़ों रुपये के लेन-देन की एंट्री में भी गड़बड़ी की गई। जांच कर रहे सीबीआई के सूत्रों की मानें, तो ये घोटाला दस करोड़ रुपये से ज्यादा का हो सकता है।

तीन अफसरों से सीबीआई थाने में पूछताछ
मंगलवार को लेफ्टिनेंट कर्नल रैंक के तीन अफसरों से सीबीआई थाना शिमला में पूछताछ हुई। इससे पहले भी जांच एजेंसी कई अफसरों से पूछताछ कर चुकी है।
उन ठेकेदारों से भी पूछताछ की जा रही है, जो सड़क निर्माण से जुड़े थे। सूत्रों का कहना है कि केस में कुछ और अफसरों के खिलाफ भी सबूत मिले हैं। जल्द ही इन्हें भी एफआईआर में शामिल किया जा सकता है।
इस मामले में बीआरओ के पूर्व चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर जेके नारंग और आईआर माथुर के खिलाफ केस दर्ज है। इसमें कुछ दिन पूर्व ही बीआरओ कार्यालय से रिकॉर्ड लिया गया है।

यह है मामला
करीब 475 किलोमीटर लंबे मनाली- लेह एनएच में से 222 किलोमीटर सड़क के रखरखाव और इसे चौड़ा करने का काम बीआरओ के पास है। यह हाइवे मनाली से सरचू तक है।
सीबीआई के अनुसार इस रोड के लिए 2006 से 2010 तक केंद्र से मिले करोड़ों रुपयों के इस्तेमाल में भारी अनियमितताएं बरती गईं। इस दौरान बीआरओ में ब्रिगेडियर जेके नारंग तथा आईआर माथुर अहम पदों पर थे।
एसपी सीबीआई आर उपासक का कहना है कि मामले में कुछ अफसरों से पूछताछ की गई है। कई अहम सबूत जुटा लिए गए हैं और इनकी जांच चल रही है।
