
उत्तरकाशी। भेड़-बकरियों से ऊन निकालने का समय नजदीक आ गया है लेकिन रास्ते ठीक नहीं होने के कारण पशुपालक अपनी भेड़-बकरियों को लेकर बुग्यालों से नीचे नहीं उतर पा रहे हैं।
मोरी प्रखंड के सुदूरवर्ती गांवों के ग्रामीणों की आजीविका भेड़ पालन पर टिकी है। गर्मियों में ग्रामीण अपनी भेड़-बकरियों को लेकर बुग्यालों में चले जाते हैं वहां से बरसात के बाद लौटते हैं। इस अवधि में भेड़ें पर्याप्त ऊन से लद जाती हैं। गांव लौटने पर भेड़ों से ऊन काटकर उसकी बिक्री की जाती है। यह ग्रामीणों की आर्थिकी का बड़ा जरिया है। इस बार भी हजारों भेड़-बकरियों के साथ ओसला, पवांणी, गंगाड़, ढाटमीर आदि गांवों के पशुपालक गर्मियों में रुइसाणा, क्यारकोटी, थांगा आदि बुग्यालों में चले गए थे। अब बरसात में सारे रास्ते खराब हो जाने के कारण होने से वे अपने मवेशियों को लेकर गांवों की ओर नहीं लौट पा रहे हैं।
गंगाड़ के उमराव सिंह ने बताया कि गोविंद वन्य जीव विहार क्षेत्र में आने वाले इस क्षेत्र में बरसात से तमाम पैदल रास्ते और पुलिया ध्वस्त पड़ी हैं। बुग्यालों में 30-40 हजार भेड़-बकरियां तथा डेढ़ सौ से अधिक पशुपालक फंसे हुए हैं। भादों 11 गते से भेड़ों से ऊन उतारी जानी है, लेकिन अभी तक भेड़ों को गांव तक लाने के रास्ते दुरुस्त नहीं हो पाए हैं। उन्होंने वन्य जीव विहार के अधिकारियों से शीघ्र रास्ते दुरुस्त करने की मांग की है।
