
चंबा। प्रदेश में भूगर्भीय हलचल पर नजर रखने को लेकर प्रदेश सरकार के पास अपना न तो कोई शोध संस्थान है और न ही कोई मानिटरिंग स्टेशन है। इस संबंध में धर्मशाला में हो रहे शोध कार्य से भी प्रदेश सरकार की मदद नहीं ले पाई है। इसका फायदा बाहरी राज्यों के संस्थान उठा रहे हैं। प्रदेश में केवल भूकंप आने से होने वाले नुकसान से बचने को डिजास्टर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट जरूर खड़ा कर रखा है। इसकी पोल कई बार खुल चुकी है। प्रदेश भूकंप को लेकर केंद्र की मदद पर ही निर्भर है। अच्छी बात यह है कि प्रदेश में भूकंप मापने की अत्याधुनिक तकनीक पर बाहरी विश्वविद्यालयों की मदद से शोध हो रहा है। इसमें प्रदेश के ही एक भूविज्ञानी लंबे अर्से से जुड़े हुए हैं। हैरतअंगेज यह है कि प्रदेश सरकार और यहां का विज्ञान एवं तकनीक विभाग इसका फायदा नहीं उठा पाया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अभी तक सरकार की ओर से भूकंप के खतरे को गंभीरता से ही नहीं लिया गया है। कांगड़ा, चंबा और मंडी जिलों में भूकंप की रेडान तकनीक केे शोध का काम लंबे अर्से से चल रहा है। रेडान गैस पर आधारित इस शोध के जरिये भूकंप से पहले और इसके बाद भूगर्भ में स्थित रेडान गैस का स्तर मापा जाता है। भूकंप आने से पहले रेडान की मात्रा बढ़ जाती है। इसके लिए भूमि में एक उपकरण लगाया जाता है, जो रेडान की मात्रा की मानीटरिंग कर डाटा रिकार्ड करता है। ऐसे उपकरण अभी तक सिर्फ धर्मशाला और पालमपुर में ही लगे हैं। चंबा के बनीखेत में भी उपकरण लगा था, मगर स्टाफ की कमी के चलते इसे हटा लिया गया। शोध के जरिये करीब दस भूकंपों के बारे में स्टीक आकंड़े प्राप्त किए जा चुके हैं। यहां दिक्कत यह है कि यह शोध सिर्फ किताबी डाटा तक सीमित होकर रह गया है। प्रदेश सरकार ने इसे सुरक्षा और व्यापक शोध की दृष्टि से अपनाने की जहमत ही नहीं उठाई है। अगर प्रदेश में इस तरह के उपकरण और इनकी नियमित मानिटरिंग के लिए स्टेशन और स्टाफ की व्यवस्था की होती, तो भूकंप के पूर्वानुमान तक पहुंचने में बड़ी उपलब्धि हासिल की जा सकती थी। रेडान शोध से जुड़े धर्मशाला के भूविज्ञानी डा. सुनील धर ने माना कि इस तकनीक को अपनाकर बड़े भूकंप का पूर्वानुमान लगाना संभव हो सकता है। इसके लिए बजट और प्रशिक्षित स्टाफ की जरूरत होगी। फिलहाल वे अकेले ही शोध कर रहे हैं। उधर, राज्य के एन्वार्यनमेंट एंड साइटिफिक टेक्नोलाजी विभाग के एसएसओ डा. सुरजीत सिंह रंधावा ने माना कि भूकंप को लेकर राज्य सरकार का कोई शोध और रिकार्ड सेंटर नहीं है। इस बारे में केंद्रीय विभागों की मदद ली जाती है।
