भाग-2: अक्टूबर में स्वतंत्रता दिवस मनाता है पाकिस्तानी कब्जे वाला कश्मीर

 नई दिल्ली
पीओके का रेडियो स्टेशन
पीओके का रेडियो स्टेशन – फोटो
पाकिस्तान ने अनैतिक व गैरकानूनी रूप से भारतीय कश्मीर के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है। यह अतिक्रमण लगभग 70 वर्ष से जस का तस बना हुआ है। इतना ही नहीं, पाक ने अपने कब्जे वाले इस भारतीय क्षेत्र को एक अलग देश घोषित कर रखा है। लेकिन ये पूरी कवायद केवल दुनिया को दिखाने के लिए है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस तथाकथित अलग देश को दुनिया से मान्यता नहीं मिली है।

दुनिया को दिखाने के लिए पाकिस्तान ने कश्मीर के इस हिस्से में एक अलग कठपुतली प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी बना रखा है। अलग पहचान के लिए झंडा भी अलग बना रखा है और हर साल 24 अक्तूबर को यौम-ए-आजादी (स्वतंत्रता दिवस) भी मनाई जाती है। पाकिस्तान की सरकारी वेबसाइट में लिखा हुआ है कि 24 अक्तूबर 1947 को कश्मीर आजाद हुआ था।

वहीं यह दावा भी किया गया है कि गिलगित को गिलगित स्काउट्स ने आजादी दिलाई थी और अब यह हिस्सा पाकिस्तान की केंद्रीय सरकार के प्रशासन में है। पूरी चालाकी के साथ पाकिस्तान ने अपने कब्जे वाले कश्मीर के रक्षा, सुरक्षा, विदेश नीति और विदेश व्यापार, करंसी नोट और सिक्कों की जिम्मेदारी अपने नियंत्रण में रखी है।

पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की दोहरी नीति है। एक तरफ तो वह इसे आजाद कश्मीर कहता है तो दूसरी ओर यहां के प्रशासन और राजनीति में सीधा दखल कर यहां के सामाजिक तानेबाने को हमेशा अस्थिर बनाए रखता है। यहां पर बाहरी लोगों को बसा दिया गया है, ताकि पाकिस्तान के खिलाफ आवाज न उठाई जाए। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का पूरा शासन इस्लामाबाद से सीधे तौर पर संचालित होता है।

मुजफ्फराबाद है राजधानी

पाक अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में 49 सीटें हैं और वहां 1974 से चुनाव प्रणाली कायम है। पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद है। पाकिस्तान इसे आजाद कश्मीर के तौर पर विश्व मंच पर पेश करता है, जबकि भारत इसे गुलाम कश्मीर कहता है। पाकिस्तान पर पीओके की निर्भरता भी किसी से छुपी हुई नहीं है।

पाकिस्तानी प्रांत बनाने की साजिश

गिलगित व बाल्टिस्तान को 1947 के बाद से ही पाकिस्तान नॉर्दर्न एरिया या उत्तरी क्षेत्र कहता रहा है। इसका प्रशासन पाकिस्तान की संघीय सरकार के तहत एक मंत्रालय चलाता था। लेकिन 2009 में पाकिस्तान ने इसे एक स्वायत्त प्रांत बना दिया, जिसके बाद से यहां मुख्यमंत्री बनाए जाने लगे, जो सरकार चलाता है। इस इलाके की अपनी अलग विधानसभा है जिसमें कुल निर्वाचित 24 सदस्य होते हैं। इस असेंबली या विधानसभा के पास बहुत ही सीमित अधिकार हैं या कहें कि न के बराबर हैं। शियाओं के पास यहां कोई अधिकार नहीं हैं।

आतंक का ट्रेनिंग स्कूल

यह तथ्य दुनिया से छुपा नहीं है कि पाकिस्नान ने पाक अधिकृत कश्मीर को आतंकवादियों का ट्रेनिंग स्कूल बना रखा है। यहां के आतंकी जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद फैलाने का काम करते हैं। 1988 से ही पाकिस्तान आतंकवादियों को यहां ट्रेंड कर जम्मू और कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए भेजता है।

सरकारी प्रोपेगेंडा का जरिया है रेडियो

पाकिस्तान ने इस कथाकथित कश्मीर में अपनी फर्जी बातों और भारत विरोध प्रचार के लिए रेडियो स्टेशन भी स्थापित कर रखा है। यहां से लगातार भारत विरोधी बातें कश्मीर के लोगों तक प्रोपेगेंडा के रूप में फैलाता रहता है। जबकि हकीकत यह है कि पाकिस्तान, कश्मीर के इस हिस्से को बांग्लादेश और बलोचिस्तान की तरह आबादी बदलकर अपना हिस्सा बनाने की कुत्सित कोशिश कर रहा है।

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