
प्रदेश सरकार की ओर से विधानसभा में पारित ‘सरकारी कर्मचारियों की भर्ती और सेवा की शर्तें विधेयक 2024’ को लेकर कर्मचारी भड़क गए हैं। कर्मचारियों ने इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस विधेयक को लाने की आवश्यकता ही नहीं थी। विधेयक में कर्मचारियों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। विधेयक में ऐसा प्रावधान न हो जिससे कर्मचारियों की सेवा और सुरक्षा को नुकसान न पहुंचे। अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष त्रिलोक ठाकुर ने कहा कि विधेयक को लागू करने से पहले सरकार महासंघ के वार्ता करे। इसमें कर्मचारियों की सुझाव को भी शामिल किया जाना चाहिए।
संयुक्त कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान, महासचिव हीरालाल वर्मा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष विनोद कुमार, वनिता सकलानी, सुनील जर्याल, उपाध्यक्ष डॉ सुरेंद्र डोकरा, मानसिंह ठाकुर, विमल शेखरी, एलडी चौहान, गीता राम, वीरेंद्र जिंटू, दिनेश शर्मा, गगन कपूर, डॉ. नितिन व्यास, आशा कुमार, बलदेव ठाकुर, यशवंत कंवर, डिप्टी जनरल सेक्रेटरी तिलक नायक, प्रकाश बादल, अरविंद मेहता, संयुक्त सचिव संतोष कुमार, अनिल कुमार, ताराचंद, हरि सिंह चौधरी, राजेश शर्मा, हेमचंद शर्मा, वित्त सचिव खमेंद्र गुप्ता, मुख्य संगठन सचिव कामेश्वर शर्मा, मुख्य सलाहकार नरेश कुमार शर्मा, ऑडिटर रविंद्र कंवर, प्रेस सचिव भूपेश शर्मा, पैटर्न गोविंद चित्रांटा, कुलदीप खरवाड़ा, रोशन लाल कपूर, अरुण गुलेरिया, राजेंद्र ठाकुर आदि महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि विधेयक को लाने की ही आवश्यकता नहीं थी। यदि लाया ही गया है तो इसमें ऐसे प्रावधान होने चाहिए थे जिससे कर्मचारियों के हितों कि रक्षा की जा सके, न कि इसके विपरीत हो।
