ब्लास्टिंग से एक दर्जन परिवार घर छोड़ने को बेबस

तीसा (चंबा)। ग्राम पंचायत टिकरीगढ़ के दलिंजन गांव के करीब एक दर्जन परिवार गांव छोड़ने को विवश हैं। यहां निर्माणाधीन 33 मेगावाट जलविद्युत परियोजना के पावर हाउस निर्माण के दौरान नियम कायदे ताक पर रख दिए गए हैं। हैरानी की बात है कि इस कंपनी की मनमानी के आगे प्रशासन व विभाग लाचार हैं। बड़े नेताओं का वरदहस्त होने के कारण न तो प्रशासन और न ही वन विभाग कोई सख्त कार्रवाई कर पाया है। ग्रामीण बार-बार शिकायत कर रहे हैं कि यहां अवैध ब्लास्टिंग और अवैध डंपिंग हो रही है, मगर प्रशासन व विभाग टस से मस नहीं हो रहे हैं। ब्लास्टिंग के कारण जहां स्थानीय लोगों के घरों में दरारें आ गई हैं, वहीं भूमि कटाव से चारागाह नष्ट हो रहे हैं। कुछ गौशालाएं तो क्षतिग्रस्त होने से गिरने की कगार पर हैं। ब्लास्टिंग के चलते कई पेड़ भी भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। ग्रामीण बताते हैं कि बघेईगढ़ के पावर चैनल व टनल निर्माण के दौरान अवैध डंपिंग भी जमकर हो रही है। सारा मलबा वन विभाग की भूमि में फेंका जा रहा है। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान हो रहा है। वन विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे तबाही का नजारा देख रहे हैं। जब दबाव पड़ता है, तो डैमेज रिपोर्ट काट कर कंपनी को जुर्माना डाल कर इतिश्री कर ली जाती है। स्थानीय निवासी रूप सिंह, औध राम, बिमलो, हरि राम व बोध राज ने बताया कि ब्लास्टिंग से उनके घरों में काफी दरारें आ गई हैं। इसके अलावा गौशालाएं व जमीन भी क्षतिग्रस्त हो गई है। इस कारण वे गांव छोड़ने क ो मजबूर हो गए हैं। उन्होंने प्रशासन से कंपनी प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। बघेईगढ़ पंचायत के पूर्व प्रधान नारद राम ने बताया कि कंपनी द्वारा धड़ल्ले से अवैध डंपिंग की जा रही है। इससे जहां उनके चारागाह नष्ट हो रहे हैं। वहीं पर्यावरण को भी नुकसान हो रहा है। तहसीलदार तीसा अनिल मनकोटिया ने बताया कि मौके का दौरा किया गया है। ब्लास्टिंग से हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार की गई है।

सरकार को भेजी जा रही है कंपनी की रिपोर्ट: रेड्डी
वन विभाग के मुख्य अरण्यपाल एआरएम रेड्डी ने कहा कि विभाग शिकायत मिलते ही कार्रवाई करता है। आईएनर्जी प्रोजेक्ट की अवैध डंपिंग की शिकायत पर डीएफओ कृपा शंकर ने मौके का मुआयना किया है। कंपनी को जुर्माना करने के साथ ही कंपनी की मनमानी की रिपोर्ट आगामी कार्रवाई के लिए भारत सरकार को भेजी जा रही है। रेड्डी ने कहा कि वन विभाग का एरिया काफी ज्यादा है और संसाधन बहुत कम हैं। पेड़ों के अवैध कटान व अवैध डंपिंग पर कार्रवाई तभी हो पाती है, जब या तो विभाग को इसका पता चले या फिर लोग विभाग को तुरंत सूचित करें। लोगों के सहयोग के बिना इतने पड़े क्षेत्र में अपने दम पर कार्रवाई करना संभव नहीं है।

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