
नैनीताल। हाईकोर्ट ने डिस्ट्रिक्ट कॉपरेटिव बैंक रुड़की को तीस दिन के भीतर 10 फीसदी ब्याज के साथ याचिकाकर्ता के समस्त देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष एवं न्यायमूर्ति सर्वेश कुमार गुप्ता की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। हरिद्वार निवासी प्रदीप कुमार चौहान ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि वह डिस्ट्रिक कॉपरेटिव बैंक रुड़की में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे तथा 31 दिसंबर, 2008 को वे वहां से रिटायर हुए। याचिका में कहा कि 26 नवंबर, 2009 को बैंक ने उनके पीएफ, ग्रेच्युटी, लिव इनकैशमेंट, बीमा और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद पांच मार्च, 2010 को एक आदेश पारित किया जिसमें कहा गया कि जब तक इनके(याची) वितरीत ऋणों की वसूली नहीं की जाती तब तक उपरोक्त लाभ न दिए जाएं। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजयवीर पुंडीर ने कोर्ट में तर्क दिया कि ग्रेच्युटी और लिव इनकैशमेंट को विधि अनुसार नहीं रोका जा सकता है क्योंकि याचिकाकर्ता के खिलाफ कभी भी कोई विभागीय कार्यवाही नहीं हुई है और न भविष्य में चल रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने तीस दिन के भीतर याचिकाकर्ता को 10 प्रतिशत ब्याज के साथ समस्त देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
