
बिलासपुर। ग्रामीण प्रशिक्षित बेरोजगार एसोसिएशन (गुरिल्ला संगठन) ने इस वर्ग की मांगें पूरी न होने पर गहरा रोष जताया है। संगठन का कहना है कि लगातार अनदेखी से गुरिल्लाें का विश्वास भारतीय शासन व्यवस्था से उठता जा रहा है। यदि आगामी लोकसभा चुनाव से पहले मांगें पूरी न हुई तो उसके बाद उठाया जाने वाला कोई भी कदम उनकी मजबूरी होगी।
सोमवार को गुरिल्ला संगठन के जिला महासचिव श्याम सिंह नेवार की अध्यक्षता में लक्ष्मी नारायण मंदिर परिसर में आयोजित बैठक में कहा गया कि जरूरत के समय उनका इस्तेमाल करके काम पूरा हो जाने के बाद उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया। इसके चलते प्रशिक्षित गुरिल्ला दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो गए हैं। केंद्र सरकार व गृह मंत्री की ओर से आश्वासन तोे कई बार मिले, लेकिन स्थिति जस की तस है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार सभी गुरिल्लों के नाम-पते भी भेजे जा चुके हैं, लेकिन इस बात का कुछ पता नहीं है कि उसके बाद बात कहां तक पहुंच पाई है।
बैठक में ‘चाहे जो मजबूरी हो, मांग हमारी पूरी हो’ का नारा बुलंद करते हुए केंद्र सरकार व विपक्षी दलों से आग्रह किया गया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव से पहले गरीबी, लाचारी व बेरोजगारी का दंश झेल रहे गुरिल्लाें को रोजगार व अन्य वित्तीय लाभ देने के लिए दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ठोेस प्रयास करें, ताकि वे अपना खोया हुआ मान-सम्मान वापस हासिल कर सकें। यदि चुनाव से पहले उनकी मांग पूरी न हुई तो वे न जाने क्या कर गुजरेंगे। बैठक मेें संगठन के चेयरमैन हीरापाल चौहान, कोषाध्यक्ष पवन कुमार तथा मीरा, उर्मिला, राजकुमारी, जमना देवी, नीलम, मनोरमा, सोमा, शुक्रू देवी, शर्मिला, प्रेम भड़ोल, सुरेश धीमान, जोगेंद्र ठाकुर, सुरेश शर्मा, रामानंद, जगत सिंह, अमर सिंह, सुच्चा सिंह व नरोत्तम सांख्यान आदि ने भाग लिया।
