बेटी की बारात से पहले तबाही ने दी दस्तक

कोटला (कांगड़ा)। ….जिस घर में लोग सुहाग के गीत गाकर इस उम्मीद से सोए थे कि सुबह बेटी को ब्याहने के लिए उनके दरवाजे पर बारात आएगी, उनका सुबह होने से पहले ही तबाही के मंजर से सामना हो गया। नियांगल गांव में मंगलवार की रात को आए कुदरत के कहर ने सात मकानों का नामोनिशान ही मिटा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में जीतो राम और उसके पांच बेटों के मकान देखते ही देखते जमींदोज हो गए।
कुदरत ने सबसे बड़ा कहर इसी गांव के पूर्ण चंद के परिवार पर ढाया। इसके घर बुधवार को उसकी बेटी अंजू की बारात आनी थी। पूर्ण चंद के परिवार ने शादी की पूरी तैयारी कर रखी थी लेकिन इस आपदा में बेटी की शादी का सारा सामान, कपड़े, गहने और राशन आदि सामान पहाड़ी के मलबे के नीचे दब गया। हालांकि, स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बुधवार सुबह कुछ सामान बाहर जरूर निकाला लेकिन पूर्ण चंद का अपनी बेटी को घर से विदा करने का सपना पहाड़ी के मलबे में ही दब गया। पंचायत के लोगों ने जैसे-तैसे सोलदा स्कूल के परिसर में बारात का इंतजाम किया। पंचायत प्रधान विजय कुमार ने पंचायत की ओर से 5 हजार रुपये की राशि दी तो वहीं सोलदां के अजमेर सिंह ने एक क्विंटल चावल दिए।
इस तरह पंचायतवासियों ने थोड़ा-बहुत राशन व अन्य सामान जुटाकर शादी का इंतजाम किया। दूसरी तरफ जीतो राम और उसके पांचों बेटों के मकान भी आपदा की भेंट चढ़ गए। इन प्रभावित परिवारों ने बताया कि उनके खून पसीने की कमाई चंद मिनटों में मिट्टी के ढेर में तबदील हो गई। पशुओं का कोई अता-पता ही नहीं है। यहां पहाड़ का मलबा खिसकने का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इसके चलते प्रशासन ने त्रिलोकपुर पंचायत से सटे न्यांगल गांव के करीब डेढ़ दर्जन मकानों को एहतियात के तौर पर खाली करवा दिया है।
भूस्खलन के कारण उजड़े परिवारों को सोलदा के मिडल और प्राइमरी स्कूलों में तंबुओं की व्यवस्था कर ठहराया गया है। इस बीच बुधवार को सांसद डा. राजन सुशांत ने कांगड़ा और पालमपुर का अपना दौरा रद कर आपदा प्रभावित परिवारों का दर्द साझा किया तथा प्रदेश सरकार व प्रशासन की तरफ से पीड़ितों को हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने का भरोसा दिलाया।

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