
देहरादून। एवरेस्ट की 8848 मीटर ऊंचाई, पल-पल मौत से सामना और हर पग पर हावी होती निराशा। आक्सीजन की कमी के साथ सांस लेने में तकलीफ के साथ टूटने सी लगतीं उम्मीदें। ताशी और नुंग्शी ने ‘सागर माथा’ पर आखिरी कदम रखने तक तमाम बाधाओं का सामना किया, लेकिन एक वजह थी, जिसने डगों को थमने नहीं दिया। यह चिंता थी मां के सिर से कर्ज का बोझ उतारने की। दरअसल, जुड़वां बहनों की मां अंजू थापा मलिक ने बेटियों का सपना साकार करने के लिए बैंक में अपने गहने गिरवी रख 6.5 लाख रुपये का लोन लिया है। अब एवरेस्ट फतह करने के बाद राज्य सरकार से 10 लाख रुपये प्रोत्साहन राशि की घोषणा ने दोनों बहनों के चेहरे खिला दिए हैं।
नुंग्शी से 26 मिनट बड़ी ताशी मलिक ने बताया कि एवरेस्ट पर चढ़ाई के दौरान दोनों बेहद थकान और निराशा महसूस कर रही थीं तो मां का लिया गोल्ड लोन याद आ गया। जाने कैसे शरीर में फिर ऊर्जा सी दौड़ पड़ी और ताशी ने नुंग्शी को कहा,‘चल नुंग्शी, मम्मा ने लोन लिया है’। बस नुंग्शी ने भी खो चुकी ताकत फिर जुटा ली और दोनों बहनों के कदम नई इबारत लिखने के बाद ही थमे। दोनों बहनों को खुशी है कि एवरेस्ट फतह के बाद अब मां के गहने वापस आ जाएंगे। उधर, मां अंजू थापा मलिक ने बताया कि वह बैंक से दस लाख रुपये लोन की उम्मीद के साथ गहने लेकर गई थीं, लेकिन दाम घटने की वजह से साढ़े छह लाख रुपये ही मिले। दोनों बहनों ने खुद को ताकत देने वाली इस बात का जिक्र सीएम विजय बहुगुणा से भी किया।
पहला लोन हो गया था माफ
ताशी-नुंग्शी के अफ्रीका में माउंट किलिमंजारो अभियान के लिए भी परिवार ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से लोन लिया था। वहां फतह प्राप्त करने पर बैंक ने लोन माफ कर दिया था।
