
नाहन (सिरमौर)। जिला के दूर दराज और दुर्गम इलाकों के 280 से अधिक सरकारी शैक्षणिक संस्थान छात्राओं के भरोसे चल रहे हैं। छात्राएं नहीं आएं तो संसाधनों की कमी से जूझ रहे इन स्कूल तथा कालेजों के बंद होने की नौबत आ सकती है। इनमें कुल 55 से 60 फीसदी छात्राएं हैं।
सुनने में भले ही अजीबो गरीब लगे लेकिन सच्चाई यही है कि जिला में 280 से अधिक स्कूलों तथा कालेजों में रौनक इन्हीं छात्राओं के बूते है। राज्य में ही अकेले वरिष्ठ स्कूलों की संख्या एक हजार के पार है। यूं तो राज्य के लगभग 70 फीसदी स्कूलों में छात्राओं की संख्या छात्रों से ज्यादा है मगर जिला के 280 स्कूलों एवं 4 कालेजों में शैक्षणिक अनुपात 58:42 का है। जाहिर है यहां छात्राओं की संख्या अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक सामान्य वर्ग के साथ ही अनुसूचित जनजाति की छात्राओं की तादात भी छात्रों से ज्यादा है। हां, अनुसूचित जाति के मामलों में बेशक छात्राएं इन स्कूलों में छात्रों के मुकाबले पीछे हैं।
चिंताजनक पहलू यह है कि मैदानी क्षेत्रों की तुलना मेें पर्वतीय क्षेत्रों के कालेजों में छात्र-छात्राओं की संख्या में ज्यादा अंतर है। मैदानी क्षेत्रों के 8 वरिष्ठ स्कूलों में छात्र 48 फीसदी और छात्राएं 52 फीसदी हैं।
संसाधनों की कमी के चलते छात्रों का पलायन
नाहन (सिरमौर)। आंकड़े कड़वी सच्चाई बयां कर रहे हैं। पहाड़ों पर छात्र पढ़ने की बजाय मैदानी इलाकों में आ रहे हैं। संसाधनों की कमी, शिक्षा की गुणवत्ता और रोजगारपरक शिक्षा में पिछड़ेपन के कारण ऐसा हो रहा है। यही कारण है कि दूरदराज के छात्रों का जिला मुख्यालयों और शहरों के स्कूल कालेजों में लगातार जमावड़ा बढ़ रहा है।
यहां हैं बेटियों से रोशन स्कूल
नाहन (सिरमौर)। जिला के शिलाई, राजगढ़, पांवटा तथा नाहन कालेजों के अलावा ददाहू, माजरा, सराहां, कालाअंब, माजरा, बनकला, पंजाहल, भरोग बनेड़ी, कन्या स्कूल नाहन, कफोटा, सतौन, कोलर, निहोग, कोरग, रोनहाट, नैनीधार जैसे वरिष्ठ तथा हाई स्कूलों में कन्याओं की तादात छात्रों से कड़ा मुकाबला कर रही है।
शिक्षा विभाग को बेटियों पर गर्व : बुराथोकी
नाहन (सिरमौर)। राज्य के उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. दिनकर बुराथोकी की माने तो छात्राओं की संख्या स्कूलों तथा कालेजों में अधिक होने से हमारे लिए गर्व की बात है। राज्य सरकार कन्याओं की शिक्षा के लिए कृतसंकल्प है। विभाग ने भी कई योजनाएं शिक्षा के क्षेत्र में चलाई हैं।
