बेघरों को बीमार होने से बचाओ सरकार!

धारचूला (पिथौरागढ़)। घर, जमीन, गांव सब कुछ आपदा की भेंट चढ़ा चुके आपदा प्रभावितों के सिर पर अब बीमार होने का खतरा मंडरा रहा है। कभी नरम बिस्तर पर सोने वाले मासूम बच्चे सीलन भरे कमरे में जमीन पर सो रहे हैं। व्यवस्था में कमी बीमारी के रूप में एक और संकट को जन्म दे सकती है। हालात कहने को विवश कर रहे हैं,बेघरों को बीमार होने से बचाओ सरकार।
राहत शिविरों में रह रहे बच्चों के माता-पिता किसी तरह किस्मत की मार को झेल रहे हैं, लेकिन मासूम बार-बार घर चलने की जिद कर रहे हैं। माता-पिता उनको बहलाने में लगे हैं। धारचूला जीआईसी के राहत शिविर में 108 परिवारों के 200 लोग रह रहे हैं। लगातार हो रही बारिश से भवन में जबरदस्त सीलन आ गई है। प्रशासन ने प्रभावितों के सोने के लिए दरी और कंबल दिए हैं। सीलन भरे कमरों में मासूमों को बीमारी से बचाने की समस्या खड़ी हो गई है।
धारचूला से 27 किमी दूर कंच्योती की जमुनी देवी चेहरे में हाथ लगाए भविष्य की उधेड़बुन में डूबी हुई प्रतीत होती है। पास में ही मासूम लक्ष्मी (1) को जमीन मेें लिटा रखा है। पूछने पर कहती हैं कि पूरा गांव ही बाढ़ में बह गया। बेटी का नाम सोच समझ कर लक्ष्मी रखा था। ख्वाब थे कि लक्ष्मी बड़ी होकर तरक्की करेगी, उसे लक्ष्मी (धन) की कभी कमी नहीं रहेगी, लेकिन एक साल में ही बेचारी बेघर हो गई। यह कहानी अकेली लक्ष्मी की नहीं है और भी तमाम बच्चे हैं, जिनका घर, आंगन, गांव उनसे छिन गया है। बालपन में मस्त इन मासूमों को तबाही की भयावहता का अंदाजा नहीं है। तीन रोज पहले डीएम डा. नीरज खैरवाल ने चारपाई देने की बात कही थी, प्रभावितों को इसी का इंतजार है।

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