
अल्मोड़ा। यदि कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो और किसी का सहारा मिल जाए तो विपरीत परिस्थितियों में भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। यह कर दिखाया है जिले के दूर सिमैला गांव के कमलजीत ने। दिमागी बुखार से पूरी तरह बधिर हो जाने के बावजूद जैंती के सिमैला गांव निवासी कमलजीत ने बीमारी से लड़ने के साथ ही पढ़ाई नहीं छोड़ी। मंगलदीप विद्या मंदिर की प्रधानाचार्या मनोरमा जोशी ने उसे बीमारी से छुटकारा दिलाने के साथ ही लगातार व्यक्तिगत परीक्षार्थी के तौर पर शिक्षा दिलाई और खुद उसे सभी विषय पढ़ाती रही। आखिरकार मेहनत रंग लाई और कमलजीत ने इस बार इंटर की परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास कर ली है। अब वह काफी हद तक स्वस्थ भी हो चुका है।
जैंती तहसील के अंतर्गत सिमैला गांव निवासी सेवानिवृत्त हवलदार त्रिलोक सिंह फर्त्याल और अनिता फर्त्याल का बेटा कमलजीत फर्त्याल दिमागी बुखार (मेनिनजाइटिस) से पीड़ित होने के बाद 2008 में पूरी तरह बधिर हो चुका था। उसके अभिभावक उसे यहां खत्याड़ी में मानसिक रूप से कमजोर और मूक बधिर बच्चों के लिए चल रहे मंगलदीप विद्या मंदिर में लेकर आए। निजी प्रयासों से मंगलदीप विद्या मंदिर की स्थापना करके मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर बच्चों के लिए काम कर रही अवकाश प्राप्त शिक्षिका मनोरमा जोशी ने कमलजीत का लगातार उत्साहवर्धन किया। उन्होंने इलाज करने के साथ ही उसकी पढ़ाई भी जारी रखी। उन्होंने कमलजीत को व्यक्तिगत परीक्षार्थी के तौर पर हाईस्कूल की परीक्षा दिलाई जिसमें उसने अच्छे अंक प्राप्त किए।
उसके बाद कमलजीत का आत्मविश्वास और भी बढ़ गया। मंगलदीप विद्या मंदिर की संचालिका मनोरमा जोशी और डा.लीना चौहान ने उसे इंटर के विभिन्न विषयों को पढ़ाया। इस बार कमलजीत ने व्यक्तिगत परीक्षार्थी के तौर पर इंटर की परीक्षा दी। मनोरमा जोशी और उनके सहयोगियों की मेहनत रंग लाई और कमलजीत माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की इंटर की परीक्षा में प्रथम श्रेणी में पास हुआ है। मनोरमा जोशी ने बताया कि स्वास्थ्य खराब रहने के बावजूद कमलजीत ने काफी मेहनत की और आज उसकी तबियत भी काफी हद तक ठीक हो चुकी है। उन्होंने इस बच्चे की लगन और मेहनत की सराहना की है। उन्होंने यह भी बताया कि इस बच्चे को यहां तक पहुंचाने में उसके चाचा का काफी सहयोग रहा।
