
शिमला। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक सतपाल सत्ती ने सवाल उठाया कि सरकार की ओर से दिए गए जवाब से स्पष्ट है कि बीडीओ दफ्तरों में करीब 100 करोड़ रुपये बिना खर्चे पड़े हुए हैं। अकेले ऊना में ही 65 लाख अनस्पेंट है। इसका सबसे बड़ा कारण रेत-बजरी की किल्लत और तस्करी है। पंचायतें निर्माण कार्य नहीं करवा पा रही हैं। 1200 रुपये का रेट का ट्रैक्टर यदि पकड़ा जाए तो 1500 रुपये जुर्माना भरना पड़ रहा है। ऐसे में काम प्रभावित हो रहा है। क्यों न सरकार पंचायत प्रधानों को रेत के परमिट जारी करे, ताकि ये काम हो सकें और बकाया पैसा भी खर्च हो सके।
जवाब में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने जानकारी दी कि राज्य में बीडीओ के 113 पदों में से 16 पद खाली हैं। इन्हें भरा जा रहा है। जहां तक परमिट जारी करने की बात है कि केंद्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने रेत के खनन पर रोक लगा रखी है। इसलिए परमिट नहीं जा सकते। सीएम ने माना कि राज्य में रेत तस्करी के कारण रेट बढ़े हैं और माफिया पनपा है।
स्वारघाट-बिलासपुर हाइवे की मरम्मत को मिले 6 करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा, इस राष्ट्रीय राजमार्ग को लेकर और धन मांगेंगे केंद्र से
नहीं टिका 2 करोड़ का पैचवर्क, ट्रक आपरेटरों ने भी की है शिकायत
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। नेशनल हाइवे अथॉरिटी ने स्वारघाट-बिलासपुर हाइवे की मरम्मत के लिए अतिरिक्त 6 करोड़ रुपये जारी किए हैं। राज्य सरकार इसकी मरम्मत के समय यह सुनिश्चित करेगी कि इससे परिवहन प्रभावित न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पहले इसकी रिपेयर के लिए 2 करोड़ रुपये जारी हुए थे। इस पर पैचवर्क भी हुआ, लेकिन हैवी ट्रैफिक से यह फिर उखड़ गया। वह भाजपा विधायक रणधीर शर्मा के सवाल के जवाब में बोल रहे थे।
रणधीर शर्मा ने सरकार से मांग की कि पैचवर्क बेहद घटिया था इसलिए इसकी जांच की जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह हाइवे गड़ामोड़ा से नेरचौक तक फोर लेन हो रहा है। लेकिन फिर इसकी मरम्मत पर राज्य सरकार को ध्यान देना है। इससे पहले ट्रक आपरेटर भी उनसे मिले हैं और उन्होंने भी यह शिकायत की है। उन्होंने लोक निर्माण विभाग को इस बारे में कार्रवाई करने को कहा है।
