
शिमला

माता पिता के सपने को सच किया आंचल ने
आंचल ने बताया कि पढ़ाई में माता-पिता, भाई और प्राध्यापकों का पूरा सहयोग मिला। उन्होंने नियमित पढ़ाई की और नोट्स के जरिए भी स्टडी की। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय परिवार और प्राध्यापकों को दिया है।
पिता विपिन वर्मा ने कहा कि दुकान चलाकर ही वह घर की रोजी-रोटी कमा रहे हैं। बचपन से ही आंचल पढ़ाई में बहुत अच्छी रही है। उसे प्रोत्साहित करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी है।

अक्षिता ने शिक्षकों को दिया श्रेय
अक्षिता ने 1700 अंकों में से 1390 अंक हासिल किए हैं। अपनी चार बहनों में दूसरे नंबर वाली अक्षिता नेगी ने कहा कि उन्हें अपनी पढ़ाई में माता-पिता, भाई और प्राध्यापकों का पूरा सहयोग मिला। जब भी कोई दिक्कत आई तो टीचर से मिलकर उसे हल किया।
वह अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और प्रोफेसरों को देती हैं। नियमित रूप से रोजाना पढ़ाई में व्यस्त रहती है
प्रशासनिक अधिकारी बनेगी किसान की बेटी
गोविंद बल्लभ पंत मेमोरियल कॉलेज की छात्रा ने परिवार का नाम रोशन किया है। पिता मोती लाल किसान हैं, जबकि माता रीना मेहता गृहिणी हैं। तनवी का कहना है कि वह प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहती हैं।
उन्हें रिजल्ट की जानकारी अमर उजाला के माध्यम से मिली। उनका गांव रामपुर से दूर होने के कारण यह सूचना नहीं पहुंची थी। उन्होंने जमा दो रामपुर गर्ल्स स्कूल से की है।

मां की मेहनत से हासिल किया मुकाम
शैलजा ने अपनी सफलता का श्रेय माता की मेहनत को दिया है। साथ ही कहा कि वह अपनी मां के सहयोग से ही यह मुकाम हासिल कर सकी हैं। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने उन्हें किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आने दी है।
उधर, धर्मशाला कॉलेज के प्राचार्य प्रो. आरपी चोपड़ा और शैलजा के अध्यापक डा. एनएन शर्मा का कहना है कि शैलजा की माता निर्मला देवी की मेहनत का ही नजीता है कि उनकी बेटी एचपीयू की मेरिट लिस्ट है। उन्होंने शैलजा और उनकी माता निर्मला देवी को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है।

टीचर बनना चाहती है दीक्षा चौहान
दीक्षा का कहना है कि शिक्षक में समाज और देश को बदलने का सामर्थ्य होता है। विवि में एमकॉम की पढ़ाई पूरी करने के बाद दीक्षा शिक्षिका बनना चाहती हैं। मूलत: हाटकोटी जुब्बल निवासी दीक्षा ने 76 फीसदी अंकों के साथ डीएवी न्यू शिमला से बारहवीं कक्षा पास की जबकि डीएवी सरस्वती नगर से 75 फीसदी अंकों के साथ दसवीं की परीक्षा पास की।
बेटी की इस उपलब्धि पर पिता बलवंत सिंह चौहान और माता सुषमा चौहान ने खुशी जताई।
मेहनत के दम पर हासिल की सफलता
बीकॉम मेरिट सूची में आठवें स्थान पर रहीं सेंटर ऑफ एक्सीलेंस संजौली कॉलेज की छात्रा सुकन्या सूद सीए बनना चाहती हैं। ‘मेहनत कभी बर्बाद नहीं होती’ का मूल मंत्र लेकर चलने वाली सुकन्या सूद ने अपनी सफलता का श्रेय अपनी कड़ी मेहनत, माता-पिता और गुरुजनों को दिया।
आईएससी बोर्ड से ऑकलैंड हाउस स्कूल से 84 फीसदी अंकों के साथ उत्तीर्ण सुकन्या की इस उपलब्धि पर पिता सुनील सूद और माता पूनम सूद फूले नहीं समा रहे। माता पूनम सूद का कहना है कि उसकी कड़ी मेहनत के बूते ही वह मेरिट सूची में स्थान बना पाई है।
