
बिलासपुर। स्थानीय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीएससी फर्स्ट ईयर के विद्यार्थियों के लिए हॉबी सब्जेक्ट की आप्शन दिखावा ही साबित हो रही है। पसंदीदा विषय चुनने के मामले में आईटी व म्यूजिक का विकल्प है, लेकिन कालेज में आईटी का प्राध्यापक ही नहीं है। ऐसे में बीएससी के छात्रों को न चाहते हुए भी तबला बजाना पड़ रहा है।
प्रदेश के कालेजों में इस सत्र से रूसा प्रणाली लागू की गई है। इस प्रणाली के तहत विभिन्न संकायों में सीटों की संख्या निर्धारित की गई है। बिलासपुर कालेज में बीएससी प्रथम वर्ष में करीब 200 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। हॉबी सब्जेक्ट के रूप में अपनी पसंद का विषय चुनने के मामले में उन्हें आईटी व म्यूजिक का विकल्प दिया गया है, लेकिन यह आप्शन कागजों तक ही सीमित है। दरअसल कालेज में आईटी विषय पढ़ाने के लिए प्राध्यापक ही नहीं है। साइंस स्टूडेंट होने के नाते अधिकांश विद्यार्थी आईटी विषय रखना चाहते हैं, लेकिन इस विषय का प्राध्यापक न होने कारण इच्छा न होते हुए भी उन्हें म्यूजिक विषय रखने पर मजबूर होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार कालेज प्रशासन ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे फिलहाल म्यूजिक विषय रख लें। आईटी के प्राध्यापक की व्यवस्था होते ही वे विषय बदल सकते हैं। इस स्तर पर विद्यार्थियों की दिक्कत यह है कि रूसा के तहत सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। प्रथम सेमेस्टर के पेपर दो-तीन माह में होंगे। ऐसे में यदि आईटी शिक्षक की व्यवस्था होने में ही डेढ़-दो माह का समय लग गया तो उसके बाद चंद दिनों में इस विषय की तैयारी वे कैसे कर पाएंगे? उधर, इस बारे कालेज प्राचार्य प्रो. आरपी चोपड़ा ने माना कि फिलहाल आईटी टीचर नहीं है। इस विषय का शिक्षक उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। कालेज प्रशासन अपने स्तर पर भी प्रयास कर रहा है। इसके तहत पीटीए के माध्यम से व्यवस्था करने का विकल्प भी है।
