
बिलासपुर। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की कवायद शुरू कर दी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अस्पतालों की खामियों पर तल्खी जाहिर करते हुए जिला के कई बीएमओ को पत्र जारी करते हुए जवाब-तलबी की है। अस्पताल में मरीजों को सुविधाएं क्यों नहीं जुटाई जा रही? क्यों मरहम पट्टी करने वाले नहीं मिले। कर्मचारियों को किसके आदेश पर डेपुटेशन में भेजा है। बिलासपुर के सरकारी अस्पतालों की खामियों को उजागर करते हुए ‘अमर उजाला’ द्वारा छेड़ी ‘लाइव कवरेज’ के बाद यह कार्रवाई की गई है।
चिकित्सकों की कमी से मरीजों का मर्ज दूर होने की बजाय और बढ़ रहा है। कहीं स्ट्रेचर टूटे-फूटे हैं तो कहीं अन्य सुविधाओं की दरकार। अधिकतर अस्पतालों में डेपुटेशन पर चिकित्सक तैनात हैं। इन खबरों पर संज्ञान लेते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमएल कौशल ने तमाम बीएमओ को पत्र जारी कर जवाब मांगा है। सीएमओ ने माना कि चिकित्सकों की कमी के कारण समस्याएं पेश आ रही है। सुविधाएं जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। ग्लूकोज आदि स्थानीय स्तर पर भी खरीदे जा सकते हैं। डेपुटेशन पर कोई कर्मचारी दूसरे अस्पताल गया है तो किसके आदेश पर। अच्छी क्वालिटी के स्ट्रेचर लेने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सीएमओ ने बताया कि जिला के सभी अस्पतालों को ग्लूकेाज की सप्लाई भेज दी गई है। दो गाड़ियां पहले आई थी। दो और आ गई है। अस्पताल प्रभारियों को लिखा गया है कि ग्लूकोज ले जाएं। जिनके पास अपनी गाड़ी नहीं है वह गाड़ी हायर कर बिल जमा करवा सकते हैं।
क्षमता से ज्यादा काम कर रहे डाक्टर
बिलासपुर। जिला अस्पताल हो या फिर अन्य। चिकित्सकों की कमी के कारण वहां पर तैनात चिकित्सक क्षमता से अधिक कार्य कर रहे हैं। सुबह आठ बजे पहुंचकर ही कई चिकित्सक अपना राउंड खत्म कर देेते हैं जबकि उसके बाद ओपीडी में कई बार शाम के सात बज जाते हैं।
