बिना कांटे के बेर पर संकट

हल्द्वानी। बेर और कांटे दोनों साथ-साथ ही होते हैं, ऐसा आमतौर पर देखा और सुना गया है, पर प्रदेश में एक बेर की ऐसी प्रजाति (भाड़ बेर) है, जिसमें कांटा नहीं होता है। यह प्रजाति संकट में है। इसके अलावा अमरूद के आकार वाले बेर की प्रजाति भी खतरे में है। ऐेसे में जंगलात की अनुसंधान शाखा ने इन प्रजातियों को संरक्षित करने की कोशिश की है।
बेर का फल इंसान को ही नहीं बल्कि बंदर से लेकर चिड़ियों तक को खूब पसंद आता है। बेर का फल जितना मीठा होता है, उसका कांटा उतना ही खतरनाक होता है। बेर और कांटे दोनों पर्याय ही माने जाते हैं, पर जैव विविधता से भरपूर प्रदेश में बिना कांटे वाले बेर की भाड़ बेर नामक प्रजाति होती है, जिसमें कांटा नहीं होता है, तराई में मिलने वाली प्रजाति के बहुत कम ही पेड़ बचे हैं। इसी तरह अमरूद के आकार वाले कट बेर की प्रजाति कट बेर भी खतरे से जूझ रही है। मुख्य वन संरक्षक अनुसंधान एसके सिंह कहते हैं कि इस प्रजाति के कुछ पेड़ राजाजी नेशनल पार्क में बचे हैं, जहां बीज को एकत्र कर अब अनुसंधान शाखा की नर्सरी में विकसित करने का काम शुरू किया गया है। हम पहाड़ में 6000 फीट पर मिलने वाले बेरी स्पीसिज को भी बचाने की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में 3000 फीट तक की ऊंचाई तक ‘मकोह प्रजाति’ बेर मिलता है, इसका फल सबसे छोटा होता है, यह भी मुश्किल में है। विभाग ने प्रदेश की छह बेर प्रजातियों को संरक्षित करने को काम शुरू किया गया है, इसके शुरुआती परिणाम बेहतर हैं। इनको नर्सरी में तैयार कर जंगल में रोपित किया जाएगा।

Related posts